अस्तित्व की लड़ाई: सोई हुई सरकार को जगाने के लिए ‘महासंघ’ ने फूँका आंदोलन का बिगुल
अस्तित्व की लड़ाई: सोई हुई सरकार को जगाने के लिए ‘महासंघ’ ने फूँका आंदोलन का बिगुल
हल्द्वानी। अपनी जायज माँगों के प्रति शासन की निरंतर उपेक्षा और नियमितीकरण जैसे संवेदनशील मुद्दों पर सरकार के अड़ियल रवैये से क्षुब्ध होकर, राज्य निगम कर्मचारी अधिकारी महासंघ ने एक बार फिर आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। आंदोलनों की इसी कड़ी में आज हल्द्वानी बस अड्डे पर महासंघ के बैनर तले कर्मचारियों ने हुंकार भरते हुए अपने आक्रोश का प्रदर्शन किया।

उम्मीदें टूटीं, तो शुरू हुआ संघर्ष
आंदोलन का आगाज़ करते हुए महासंघ के प्रदेश सचिव श्री श्याम सिंह नेगी जी ने बेहद भावुक स्वर में कहा: “हमने बार-बार शासन के द्वार खटखटाए, 10 सूत्रीय माँग पत्र के माध्यम से अपनी व्यथा सुनाई, लेकिन बदले में हमें सिर्फ कोरे आश्वासन मिले। जब सरकार कर्मचारियों की जायज आवाज़ को अनसुना कर दे, तो आंदोलन करना हमारी मजबूरी नहीं, बल्कि अस्तित्व को बचाने की विवशता बन जाती है।”
“हम कर्मचारियों को भी जगाएंगे और सरकार को भी”
महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष श्री दिनेश पंत जी ने कर्मचारियों को संबोधित करते हुए स्पष्ट संदेश दिया कि अब चुप बैठने का समय बीत चुका है। उन्होंने कहा:
“हमारा यह संघर्ष केवल अधिकारों के लिए नहीं, बल्कि न्याय के लिए है। हम एक अभियान चलाएंगे जिसके तहत सोए हुए कर्मचारियों को उनके अधिकारों के प्रति जगाएंगे और उस बहरी सरकार को भी नींद से उठाएंगे जो हमारी ज्वलंत समस्याओं को देख कर भी अनदेखा कर रही है। नियमितीकरण हमारा हक है और इसे लेकर ही रहेंगे।”
नियमितीकरण तक नहीं रुकेंगे:
रोडवेज कर्मचारी संयुक्त परिषद के प्रदेश अध्यक्ष श्री बलदेव प्रसाद जी ने कहा कि सरकारी निगमो में नियमित कर्मचारीयो का अकाल पड़ चुका है इन जिम्मेदार निगमों को अस्थाई कर्मचारियों के भरोसे चलाना कहां तक जायज है इसलिए नियमितीकरण होने तक यह आर पार की लड़ाई जारी रहेगी,
जरूरत पड़ी तो, देंगे “वोट की चोट:
महासंघ के प्रदेश उपाध्यक्ष रमोला जी ने कहा अगर सरकार नहीं सुनती है तो, हमें एक हो कर “वोट की चोट” करने से भी पीछे नहीं होना चाहिए,
प्रमुख मुद्दे जिन पर उपजा आक्रोश:
10 सूत्रीय माँग पत्र: शासन द्वारा लंबे समय से लंबित माँगों पर कोई सकारात्मक पहल न करना।
*नियमितीकरण:* वर्षों से सेवा दे रहे कर्मचारियों के नियमितीकरण पर ठोस निर्णय का अभाव।
उपेक्षा: वार्ता के बावजूद शासन के रुख में संवेदनशीलता की कमी।
आगामी रणनीति:
आज हल्द्वानी बस अड्डे से शुरू हुआ यह आगाज मात्र एक शुरुआत है। महासंघ ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि शीघ्र ही सरकार ने ठोस कदम नहीं उठाए, तो महासंघ के घटक, प्रदेश के 14 निगमों के साथ यह आंदोलन पूरे प्रदेश में उग्र रूप धारण करेगा, जिसकी समस्त जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

