उत्तराखंड

जल निगम-जल संस्थान संयुक्त मोर्चा ने 24 फरवरी से अनिश्चितकालीन हड़ताल की दी चेतावनी

देहरादून।जल निगम-जल संस्थान संयुक्त मोर्चा की उच्चाधिकार समिति की बैठक आज दिनांक 16.02.2024 को आयोजित की गई। उक्त बैठक में उत्तराखण्ड पेयजल निगम एवं उत्तराखण्ड जल संस्थान का एकीकरण करते हुये राजकीयकरण करने की मांग की गई तथा कैबिनेट में उक्त विषय को शीघ्र माननीय कैबिनेट में लाने की मांग की गई। साथ ही बैठक में UUSDA द्वारा कराये जा रहे समस्त पेयजल/सीवरेज निर्माण कार्य को उत्तराखण्ड पेयजल निगम एवं उत्तराखण्ड जल संस्थान को हस्तान्तरित करने की मांग की गई। साथ ही यह भी मांग की गई कि शहरी विकास विभाग द्वारा पूर्व में कराये गये ए०डी०बी० के कार्यों की एस०आई०टी० जांच की जाये। बैठक में उपस्थित पदाधिकारियों ने कहा कि एस०आई०टी०कम कुछ भी मंजूर नहीं है।

जांच से जल संस्थान-जल निगम संयुक्त मोर्चे के संयोजक विजय खाली ने बताया कि ए०डी०बी० द्वारा पूर्व में कराये गये कार्यों की उच्च स्तरीय जांच आवश्यक है। शहरी विकास विभाग के अधिकारियों द्वारा लगातार ए०डी०बी० विंग द्वारा किये

जा रहे काले कारनामों पर पर्दा डाला जा रहा है। जनपद नैनीताल में हल्द्वानी में ए०डी०बी० द्वारा वर्ष 2013 में 17 टैंक बनवाये गये थे जिनमें से 08 टैंक तो बनने के बाद से ही लगातार लीक हैं। लीक टैंको की लागत की भरपाई एजेन्सी से न कराना अपने आप में शहरी विकास विभाग के अधिकारियों के आचरण को प्रदर्शित करता है। इन 08 लीक टैंको से अब तक अरबों लीटर पानी का अपव्यय हो चुका है। उक्त पानी के उत्पादन में लगी बिजली की लागत ही लाखो रूपये है।

धन्य है, शहरी विकास विभाग, जिसके इंजीनियर्स को काली सूची में डाल कर बर्खास्त किया जाना चाहिये थे, उन्हें पूरी UUSDA का ही सर्वे सर्वा बना दिया गया। मोर्चे के संयोजक श्री रमेश विजोला ने कहा कि नलकूप निर्माण हेतु सन् 1975 से ही जल संस्थान एवं जल निगम विशेषज्ञ विभाग है, जिन्हे पूरे क्षेत्र के भूगर्भीय स्थिति का अनुभव है वहीं ए०डी०बी० के प्रतिनियुक्ति पर बिजली विभाग के अभियन्ताओं ने भूगर्भीय स्थिति के विपरीत अज्ञानता व इतर कारणों से क्षेत्र के स्ट्राटा के विपरीत अधिक गहराई के नलकूप बनाये गये जबकि नलकूप क्षेत्र के विशेषज्ञ विभाग जल निगम / जल संस्थान व सिंचाई विभाग के अभियन्ता भली-भांति विज्ञ हैं कि देहरादून में निचली सतह (200 मीटर से नीचे) शिवालिक चट्टाने हैं जिससे भू-जल की उपलब्धता नहीं है। ए०डी०बी० द्वारा बनाये गये नलकूप में अधिक गहराई तक आवश्यक ड्रिलिंग कर ठेकेदार को लाभ पहुंचाया गया है। एक नलकूप (बीमा कॉलोनी) तो ऐसे स्थान पर बना दिया गया जहां नलकूप की साध्यता को उत्तराखण्ड पेयजल निगम / उत्तराखण्ड जल संस्थान पूर्व में नकार चुके हैं। यहां पर नलकूप निर्माण कर 1.25 करोड़ रूपये खर्च कर दिये गये।जबकि वहां बमुश्किल 150 एल०पी०एम० भी श्राव नहीं मिल पा रहा है। उक्त के अतिरिक्त जल निगम-जल संस्थान संयुक्त मार्चे के संयोजक (गढ़वाल) श्री श्याम सिंह नेगी ने बताया कि UUSDA के अधिकारियों ने मूल मंत्र दिया है कि “यावत्-जीवते सुखम् जीवते ऋणम् कृत्वा घृतम् पिवते” इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है कि ए०डी०बी० के प्रथम चरण में स्वीकृत धनराशि को जब पेयजल/सीवरेज कार्यों में नहीं खपाया जा सका तो उक्त बजट को सड़क किनारे सौर्दयीकरण में खर्च कर दिया गया। इसके तहत जहां राजपुर रोड़ पर सड़क किनारे बिना किसी नियोजन के कार्य करा दिये गये, वहीं बोलार्ड द्वारा विद्युतीकरण कार्य मात्र कागजों में कराया गया। राजपुर रोड़ पर
जल संरक्षण के नाम पर जो संरचना बनायी गयी है, वह क्षेत्र विशेष के अनुरूप नहीं है। इसकी उच्च स्तरीय जांच आवश्यक है।बैठक के अंत में एकमत से विचार व्यक्त किया गया कि उत्तराखण्ड पेयजल निगम व उत्तराखण्ड जल संस्थान का राजकीयकरण करते हुए एकीकरण करने की मांग और शहरी विकास विभाग द्वारा पेयजल विभाग के काम किए जाने के विरोध में पेयजल निगम कार्मिकों द्वारा जनवरी माह में किया गया आंदोलन मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी जी के आश्वासन पर 20 फरवरी तक के लिए स्थगित किया गया था। मुख्यमंत्री जी द्वारा दिए गए आश्वासन पर संयुक्त मोर्चा के पदाधिकारी के अनुरोध पर पेयजल कर्मचारी अपना धरना स्थगित करने और हड़ताल न करने के लिए मान गए थे। लेकिनशासन के अधिकारियों द्वारा अभी तक एक भी मांग पर कोई शासनादेश जारी नहीं किया गया है। इसके विरोध में पेयजलनिगम कार्मिकों का संयुक्त मोर्चा पदाधिकारी पर तत्काल हड़ताल प्रारंभ करने का दबाव बनाया जा रहा है। यहाँ यह भी

विचारणीय है कि शीघ्र ही आचार संहिता लागू होने के दृष्टिगत अब हड़ताल के अलावा कोई अन्य विकल्प शेष प्रतीत नहीं होता। अतः उच्चाधिकार समिति द्वारा एकमत से निर्णय लिया गया कि यदि 20 तारीख तक शासन शासनादेश जारी नहीं किया जाता है तो 21 फरवरी 2024 को उच्चाधिकार समिति की बैठक करके दिनांक 24 फरवरी 2024 से निश्चित हड़ताल का निर्णय लिया जाएगा, जिसका संपूर्ण उत्तरदायित्व शासन के अधिकारियों का होगा।

बैठक में निम्न कार्मिक उपस्थित रहे :-

श्री रमेश विंजोला, श्री विजय खाली, श्री श्याम सिंह नेगी, श्री राम चन्द्र सेमवाल, श्री गौरव बर्तवाल, श्री अजय सिंह चौहान, श्री मानवर सिंह विष्ट, श्री यचन सिंह, श्री लाल सिंह रौतेला, श्री शिशुपाल सिंह रावत, श्री विनोद सिंह, श्री आशीष तिवारी, श्री धन सिंह चौहान, श्री संदीप मल्होत्रा, श्री आनंद सिंह राजपुत, श्री लक्ष्मी नारायण भट्ट, श्री राम कुमार, श्री भजन सिंह चौहान।

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