उत्तराखण्ड में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना से सम्बन्धित वन भूमि प्रत्यावर्तन प्रस्तावों को विशेष बल देने के साथ वन (संरक्षण) संशोधन अधिनियम, 2023 पर एक दिवसीय कार्यशाला 19 मई, 2025
उत्तराखण्ड में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना से सम्बन्धित वन भूमि प्रत्यावर्तन प्रस्तावों को विशेष बल देने के साथ वन (संरक्षण) संशोधन अधिनियम, 2023 पर एक दिवसीय कार्यशाला 19 मई, 2025
देहरादून।उत्तराखण्ड का अधिकांश भू-भाग मध्य हिमालय का पर्वतीय क्षेत्र होने के कारण प्रायः यहाँ परिवहन की समुचित व्यवस्था का अभाव रहा है। वर्तमान में राज्य की विषम भौगोलिक परिस्थिति, अधिकांश बसावटों का वन भूमि के समीपवर्ती क्षेत्रों में अवस्थित होने, रोजगार एवं अन्य संसाधनों के अभाव इत्यादि में राज्य से निरन्तर पलायन होना एक आम बात हो गयी है। उक्त कम में भारत सरकार द्वारा संचालित “प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना” (पी.एम.जी.एस.वाई.) एक महत्वाकांक्षी परियोजना है। जिसके अन्तर्गत उत्तराखण्ड शासन असंयोजित बसावटों को ग्रामीण मार्गों के निर्माण कार्य से संयोजित करने हेतु विगत 25 वर्षों से बचनबन है। परन्तु पी.एम.जी.एस.वाई. के अन्तर्गत चयनित मार्गों हेतु अधिकांश बसावटों का वन भूमि के अन्दर अवस्थित होने, समीपवर्ती वन क्षेत्र, राष्ट्रीय उद्यान अथवा वन्यजीव अभ्यारण्य से गुजरने के कारण प्रायः ग्रामीण बसावटों का संयोजन कार्य सांविधिक स्वीकृतियां प्राप्त करने में अत्यधिक समय लगने के कारण स्थिल पड़ जाता है, जिसके कारण पी.एम.जी.एस.वाई. के लक्ष्य की पूर्ति हेतु भारत सरकार द्वारा निर्धारित मानकों एवं दिशा-निर्देशों के अनुपालन करने में प्रायः विलम्ब की स्थिति से गुजरना पड़ता है। परिणाम स्वरुप राज्य की विषम भौगोलिक परिस्थिति जैसे आपदा प्रकोप, वन भूमि की अधिकता, समय-समय पर अधिनियमों में संशोधन के साथ अनुपालनात्मक कार्यवाही में विलम्ब इत्यादि कारणों से वित्तीय वर्ष में भौतिक लक्ष्य पूर्ण नहीं हो पाता है।

उपरोक्त अनुक्रम में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना से सम्बन्धित वन भूमि प्रत्यावर्तन प्रस्तावों को विशेष बल देने के साथ वन (संरक्षण) संशोधन अधिनियम, 2023 पर ग्राफिक ईरा डीम्ड विश्वविद्यालय देहरादून में एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिससे कि उत्तराखण्ड में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अन्तर्गत प्रस्तावित ग्रामीण सडकों के निर्माण एवं असंयोजित बसावटों से सम्बन्धित वन भूमि प्रत्यावर्तन प्रस्तावों के निराकरण में तेजी आयेगी। उक्त कार्यक्रम में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (भारत सरकार) दिल्ली एवं क्षेत्रीय कार्यालय, देहरादून से उपस्थित श्रीमती नीलिमा शाह (सहायक वन महानिरीक्षक क्षेत्रीय कार्यालय देहरादून), डॉ. विपिन गुप्ता (वैज्ञानिक-सी), श्री हरे राम कुमार (तकनीकि अधिकारी, वानिकी), श्री कृष्नेन्दू बनर्जी (वरिष्ठ तकनीकी सहयोगी), श्री गौरव चमोली (तकनीकी टीम लीडर, दिल्ली) एवं श्री विकास कुमार (टीम लीडर, परिवेश पोर्टल हेल्पडेस्क, दिल्ली) ने अपना अमूल्य समय देकर प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अन्तर्गत कार्यरत एवं वन भूमि से सम्बन्धित लगभग 70 अभियन्ताओं को अपना व्याख्यान एवं अनुभव साझा किया। उक्त कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ. एस.डी तिवारी, वरिष्ठ सलाहकार (पर्यावरण एवं सामाजिक विशेषज्ञ) द्वारा किया गया एवं ई. एस. के पाठक (मुख्य अभियन्ता, यू.आर.आर.डी.ए.) द्वारा कार्यशाला में उपस्थित समस्त प्रतिनिधियों एवं पी. आई.यू. से उपस्थित समस्त प्रतिभागियों हेतु एक स्वागत व्याख्यान दिया गया।
उत्तराखण्ड में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना से सम्बन्धित वन भूमि प्रत्यावर्तन प्रस्तावों को विशेष बल वेने के साथ वन (संरक्षण) संशोधन अधिनियम, 2023 पर एक विवसीय कार्यशाला 19 मई, 2025
कार्यक्रम में उपस्थित विषय विशेषज्ञों, ग्राफिक ईरा डीम्ड विश्वविद्यालय देहरादून एवं पी.आई. यू. के मध्य समन्वय स्थापित करने एवं कार्यशाला के सफल संचालन में ई. विजयपाल सिंह नेगी (अधि. अभियन्ता), श्री शंकर राम (सेवानिवृत्त डी.एफ.ओ.), श्री एस.एन. त्रिपाठी (सेवानिवृत्त एस.डी.ओ.), ई. एस. के पाण्डेय (सहा. अभियन्ता) एवं इं. मोहित उनियाल (सहा. अभियन्ता) का महत्वपूर्ण योगदान रहा एवं तकनीकि सहयोग आदि में श्री के. पी. गुसांई (आई.टी. विशेषज्ञ), श्री निशांत पुण्डीर, श्री सौरभ चौहान, कु. दीपिका एवं श्री महेश भट्ट इत्यादि मौजूद रहे।
अतः एक दिवसीय कार्यशाला के सफल आयोजन से यू.आर.आर.डी.ए. (पी.एम.यू.), परियोजना कियान्वयन इकाई व भारत सरकार के अधीन कार्यरत प्राधिकरणों के मध्य वन भूमि प्रत्यावर्तन प्रस्तावों में आने वाले समस्याओं का पारदर्शिता के साथ त्वरित निराकरण हो पाना सम्भव हो सकेगा।

