उत्तराखंड विद्युत अधिकारी कर्मचारी संयुक्त संघर्ष मोर्चा का आंदोलन शुरू
उत्तराखंड विद्युत अधिकारी कर्मचारी संयुक्त संघर्ष मोर्चा का आंदोलन शुरू
देहरादून।आज दिनांक 30 जनवरी 2026 को उत्तराखंड विद्युत अधिकारी कर्मचारी सहयोग संघर्ष मोर्चा के राज्य स्तरीय आंदोलन कार्यक्रम के प्रथम जन जागरण आंदोलन कार्यक्रम के प्रथम चरण के अंतर्गत ढालीपुर पावर हाउस में मोर्चा की विशाल आम सभा आयोजित कीगई।आज की सभा की अध्यक्षता श्री अजय कुमार सिंह तथा संचालन वीरेंद्र कुमार के द्वारा किया गया।

सभा में मोर्चा के अध्यक्ष युद्धवीर सिंह तोमर, मोर्चा संयोजक इंसारूल हक, राकेश शर्मा, सुनील मोगा, विनोद कवि, पंकज सैनी राजवीर सिंह, बीरबल सिंह, एचएस रावत, गोविंद नौटियाल, याकूब अली, सुनील तंवर, अरविंदबहुगुणा ने अपने विचार रखें।

आज की सभा में 19 सूत्रीय मांग पत्र के बारे में कर्मचारी संगठनों के द्वारा स्पष्ट किया गया की प्रथम बिंदु डाकपत्थर की भूमि को उत्तराखंड निवेश एवं निर्माण बोर्ड को हस्तांतरित किए जाने के शासन आदेश को निरस्त किए जाने तक तथा अन्य समस्याओं का हाल होने तक आंदोलन चलता रहेगा और सभी कर्मचारी चरणबद्ध आंदोलन हेतु तत्पर है।

मोर्चा के द्वारा अवगत कराया गया कि जल विद्युत परियोजनाओं की जमीन को बाहरी कंपनियों को दिए जाने के षड्यंत्र के खिलाफ मोर्चा प्रत्येक स्तर पर संघर्ष करेगा तथा नोटिस के अनुसार हड़ताल प्रारंभ कर दी जाएगी। इसके अतिरिक्त विभिन्न समस्याएं जो कार्मिकों के हितों से जुड़ी है जिन पर लगातार प्रशासन द्वारा कोई कार्यवाही नहीं की गई है का तत्काल समाधान किया जाए।
आज की सभा में कुल्हाल,ढकरानी, ढालीपुर , आसन बैराज पर तैनात अभियंता, अवर अभियंता, टेक्नीशियन कार्यालय एवं संविदा कार्मिकों ने भाग लिया।
सभा में राम सिंह , बृजमोहन तिवारी, साउद खान,सुशील भंडारी, वीरेंद्र कुमार, प्रकाश कुमार, खिलेश पांडे, संजीव आर्य उदयनत चौहान, रितेश तोमर, सुखवीर सिंह,अंजलि,आशिस राणा,संदीप राणा , गिरीश कुमार, राहुल गोयल, विवेक कुमार, मनजीत सिंह तोमर, अमित बहुगुणा, सुभाष के साथ सैकड़ो कर्मचारी सम्मिलित हुए। आज के कार्यक्रम में कर्मचारियों द्वारा 2020 के बाद विद्युत टैरिफ की सुविधा, 2600 ग्रेड वेतन वाले कार्मिकों को तृतीय एसीपी 6600 प्रदान किया जाना, 2005 की विज्ञप्ति के आधार पर पुरानी पेंशन, तीनों ऊर्जा निगमों का एकीकरण, उपनल संविदा कार्मिकों को समान कार्य समान वेतन तथा नियमितीकरण, और अभियंता सहायक अभियंता तथा टेक्नीशियन की प्रारंभिक वेतन वृद्धि के सहित 19 बिंदुओं पर विचार प्रकट किए गए।
मोर्चा अध्यक्ष तथा मोर्चा संयोजक के द्वारा शासन प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी दी गई कि अगर परियोजनाओं की भूमि बिना कर्मचारी संगठनों की सहमति के हस्तांतरित की जाती है तो कर्मचारी संगठन उग्र आंदोलन हेतु बाध्य होंगे। मोर्चा का कहना है कि विकास कार्य हेतु मोर्चा की सहमति है किंतु वर्तमान में चल रही राष्ट्रीय स्तर की परियोजनाओं हेतु आवंटित भूमि को अन्य कार्यों में देने से लखवाड़ परियोजना के विलंब होने की पूरी संभावना है।

