उत्तराखंड

विद्युत कार्मियों ने UJVNL मुख्यालय में दिया धरना

विद्युत कार्मियों ने UJVNL मुख्यालय में दिया धरना

देहरादून।आज दिनांक 17 मार्च 2026 को उत्तराखंड विद्युत अधिकारी कर्मचारी संयुक्त संघर्ष मोर्चा के द्वारा उत्तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड के मुख्यालय उज्जवल महारानी बाग देहरादून पर एक गेट मीटिंग का आयोजन किया गया। आज की मीटिंग की अध्यक्षता इंजीनियर युद्धवीर सिंह तोमर मोर्चा , तथा संचालन पंकज सैनी के द्वारा किया गया।

आज की सभा में उत्तराखंड विद्युत अधिकारी कर्मचारी संयुक्त संघर्ष मोर्चा के द्वारा जनवरी में दिए गए समस्या पत्र तथा उसके पूर्व माह दिसंबर में यमुना परियोजना की भूमि को यूआईआईडीबी को हस्तांतरित किए जाने के शासन आदेश के विरोध में दिए गए पत्रों पर ऊर्जा निगमो के द्वारा कोई कार्यवाही नही किए जाने के कारण कर्मचारी वर्ग में व्याप्त असंतोष पर चर्चा हुई।

आज की सभा में संयोजक इंसारूल हक , सहसंयोजक राजवीर सिंह ,प्रदीप कंसल तथा मोर्चा के अन्य पदाधिकारीयो श्री केहर सिंह, अमित रंजन, सुनील तंवर, विनोद कवि, बीरबल सिंह, गोविंद नौटियाल, रेखा डंगवाल, सुनील मोगा, प्रदीप प्रकाश शर्मा,अशोक सैनी ,एच एस रावत, सुखजीत सिंह मनोज रावत, बृजेश कुमार, मनदीप सिंह,संजय राणा, सुंदर लाल, भगवान सिंह, सुमित सेमवाल, वीरेंद्र नेगी, एक के सूद, मनजीत सिंह तोमर, प्रदीप प्रकाश शर्मा, रचित फरतियाल, नीतू रानी, तारा रानी, विमलेश, बीएम तिवारी ,साउद खान, साक्षी, सीमा, अरविंद बहुगुणा, राजेश तिवारी, प्रेम प्रकाश, रितु पुलकित, माया तोमर , सुखबीर सिंह, राम सिंह,रिंकी तोमर, संजीव आर्य, प्रवेश कुमार, भगवान प्रसाद, सुप्रिया बडोनी, सुनील कुमार, राम श्री,कलम सिंह चौहान, अभिलाष यादव,राजेंद्र, सतनाम सिंह, एहसान मोहम्मद, आनंद सिंह रावत, प्रकाश सिंह जेड़ा , छोटू तोमर ने अपने विचार रखें। आज की सभा में देहरादून मुख्यालय के कर्मचारियों तथा विभिन्न क्षेत्रों से आए संगठन पदाधिकारी ने इस बात पर भारी रोष प्रकट किया कि मोर्चा के द्वारा विभिन्न समस्याओं को मौखिक एवं लिखित रूप से बार-बार देने के बाद भी निगमों का प्रबंधन कर्मचारियों को हड़ताल पर जाने को विवश कर रहा है। कर्मचारी संगठनों ने खेद व्यक्त किया कि अभी तक तीनों निगमो में कर्मचारियों की किसी भी समस्या पर कोई समाधान नहीं किया गया है।

मोर्चा के 19 सूत्रीय समस्या पत्र में विगत 4 -5 वर्ष से कर्मचारियों की लंबित समस्याओं को सम्मिलित करते हुए पूर्व में ही उत्तराखंड शासन तथा तीनों ऊर्जा निगम प्रबंधन को अवगत कराया गया था। किंतु प्रबंधन की उदासीनता से ऐसा प्रतीत होता है कि प्रबंधन को औद्योगिक शांति स्थापित करने के विषय में कोई चिंता नहीं है।

आज की सभा में मुख्य रूप से

1. यमुना परियोजना की संपूर्ण 180 एकड़ भूमि को बिना किसी अध्ययन अथवा विभागीय सहमति के यूआईआईडीबी को हस्तांतरित करने के शासन आदेश को निरस्त करने की मांग की गई जिससे जल विद्युत परियोजनाओं का परिचालन एवं भविष्य की परियोजनाओं हेतु भूमि उपलब्ध रहे। मोर्चा के इंसारूल हक , अध्यक्ष श्री युद्धवीर सिंह तोमर, राकेश शर्मा ने बताया कि उक्त का शासन आदेश जारी होने से पहले किसी भी कर्मचारी संगठन अथवा स्टेक होल्डर से कोई चर्चा नहीं की गई। उक्त शासनादेश विसंगति पूर्ण इसलिए हो जाता है क्योंकि इसके माध्यम से पूरी उपलब्ध भूमि एक ऐसी एजेंसी को ट्रांसफर करने का आदेश किया गया है जिसका जल विद्युत परियोजना से कोई लेना-देना नहीं है। मोर्चा के समस्या पत्र में उपनल, आउटसोर्स, सेल्फ हेल्प,चतुर्थ श्रेणी कार्मिक से लेकर, अवर अभियंता अभियंता स्तर तक सभी कर्मचारियों की विभिन्न समस्याएं प्रबंधन को दी गई है किंतु इस विषय में ना तो कोई समाधान किया गया ना कोई वार्ता आयोजित की गई।

_मोर्चा के द्वारा 27 मार्च को उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन मुख्यालय पर विशाल सत्याग्रह, 6 अप्रैल 2026 को उत्तराखंड जल विद्युत निगम मुख्यालय पर सत्याग्रह करते हुए *7 अप्रैल मध्यरात्रि* से हड़ताल की घोषणा की गई है।*
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उत्तराखंड विद्युत अधिकारी कर्मचारी संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने उत्तराखंड सरकार द्वारा उत्तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड (UJVNL) के डाकपत्थर और ढालीपुर स्थित जल विद्युत परियोजनाओं की 76.73 हेक्टेयर भूमि को उत्तराखंड इंफ्रास्ट्रक्चर एंड इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट बोर्ड के माध्यम से निजी क्षेत्र से आवंटित करने के निर्णय का भी कड़ा विरोध किया गया। सभी घटक संगठनों ने चेतावनी दी कि जल विद्युत परियोजनाओं के लिए सुरक्षित भूमि को अन्य प्रयोजनों में हस्तांतरित करना लखवाड, किशाऊ तथा यमुना बेसिन की अन्य महत्वपूर्ण परियोजनाओं के विकास को गंभीर रूप से प्रभावित करेगा और इसका प्रदेश के सभी बिजली कार्मिक, अवर अभियंता, अभियंता और कर्मचारी जोरदार विरोध करेंगे।

इन परिस्थितियों को देखते हुए मोर्चा ने

* यमुना परियोजना की डाकपत्थर स्थित भूमि का हस्तांतरण रद्द किया जाए।
* तीनों ऊर्जा निगम में कार्यरत उपनल, सेल्फ हेल्प तथा आउटसोर्स कार्मिकों को समान कार्य समान वेतन तथा नियमितीकरण का लाभ तत्काल प्रदान किया जाये।
* वर्ष 2020 के बाद नियुक्त कार्मिकों को विद्युत टैरिफ सुविधा पूर्व की भांति प्रदान की जाए।
* 2600 ग्रेड वेतन में नियुक्त कार्मिकों को ग्रेड वेतन 3000 को नोंन फंग्शनल करते हुए प्रथम एसीपी 4600 तथा तृतीय एसीपी पूर्व की भांति 6600 ग्रेड वेतन तथा
* चतुर्थ श्रेणी कार्मिकों को 19 वर्ष की सेवा होने पर 4600 ग्रेड वेतन का लाभ प्रदान किया जाए।
* अवर अभियंता को प्रारंभिक वेतनमान 4800 तथा नियुक्ति पर दो वेतन वृद्धि का लाभ सातवें वेतन आयोग में भी प्रदान किया जाए।
* नियुक्ति पर मिलने वाली प्रारंभिक वेतन वृद्धि का लाभ सातवें वेतन आयोग में भी पूर्व की भांति सहायक अभियंता,अवर अभियंता तथा टेक्नीशियन को दिया जाये।
* उत्तराखंड शासन की भांति वर्ष 2005 तक निकाली गई विज्ञप्तियों के सापेक्ष नियुक्त कर्मचारियों को जीपीएफ तथा पुरानी पेंशन का लाभ दियाजाए।
* टीजी 2 तथा टी जी 1 के पदों को एक करते हुए एक पदनाम टेक्नीशियन किया जाए।
* इसकी अतिरिक्त मोर्चा के समस्या पत्र में दी गई सभी समस्याओं पर जब तक वार्ता अथवा समाधान नहीं होता तब तक मोर्चा का आंदोलन कार्यक्रम जारी रहेगा।

सभा के अंत में मोर्चा के सभी घटक संगठनों ने वार्ता के माध्यम से 19 सूत्रीय समस्याओं का समाधान न होने की स्थिति में 27 मार्च को उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन मुख्यालय पर राज्य स्तरीय सत्याग्रह तथा 7 अप्रैल से होने वाली हड़ताल को सफल बनाने का संकल्प लिया।

 

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