उत्तराखंड

उत्तराखण्ड जल संस्थान अधिकारी/कर्मचारी संयुक्त मोर्चा ने मुख्य महाप्रबन्धक, जल संस्थान को लिखा पत्र, ये है कारण

सेवा में,

मुख्य महाप्रबन्धक

उत्तराखण्ड जल संस्थान

जल भवन बी-ब्लॉक,

नेहरू कालोनी, देहरादून।

विषयः-उत्तराखण्ड जल संस्थान का राजकीयकरण किये जाने के सम्बन्ध में।

महोदय,

उपरोक्त विषयक अवगत कराना है कि प्रदेश भर में विभागीय अधिकारी एवं कर्मचारियों द्वारा पूर्ण निष्ठा एवं लग्न से विभागीय दायित्वो का निर्वहन किया जा रहा है। प्रदेश भर में पेयजल एवं जलोत्सारण व्यवस्था सुचारू रूप से संचालित है। राजस्व प्राप्ती में भी विभगीय कार्मिको का उत्कृष्ठ योगदान है। विभागीय कार्मिको के जन प्रतिनिधियों एवं स्थानीय नागरिको से बेहतर जन सम्पर्क के कारण विभाग पेयजल क्षेत्र एक उच्चस्थ स्थान बना पाया है। इन्ही कार्मिको के अथक प्रयास एव कठोर मेहनत से विभाग की वित्तीय स्थिति सुदृढ हुयी है। विगत वर्षों में शासन / सरकार द्वारा कई महत्वपूर्ण योजनाये अनुरक्षण एवं रखरखाव हेतु पेयजल निगम को हस्तान्तरित कर दी गयी है। इनमें वह योजनायें भी सम्मिलित है, जिनसे विभाग को अच्छा राजस्व प्राप्त होता है। शासन एवं सरकार की इस नीति/कार्यवाही का उत्तराखण्ड जल संस्थान प्रबन्धक पक्ष द्वारा न ही किसी प्रकार का प्रतिरोध किया गया न ही अपना पक्ष सबलता के साथ रखा गया। परिणाम स्वरूप पेयजल निगम को योजनाओं का हस्तान्तरण निरन्तर जारी है। इसका कुप्रभाव जल संस्थान की वित्तीय व्यवस्था पर पडना स्वभाविक है। शासन / सरकार / प्रबन्धक पक्ष की इस कार्य प्रणाली से जहाँ जल संस्थान के अधिकारियों, कर्मचारियों एवं पेंशनरों के हित असुरक्षित हो गये हैं, वही सभी में आक्रोश व्याप्त है।

दिनांक 06.0.06.2026 को उत्तराखण्ड जल संस्थान, अधिकारी / कर्मचारी संयुक्त मोर्चा की हुयी बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि उत्तराखण्ड जल संस्थान के अधिकारियों, कर्मचारियों एवं पेंशनरों के हित सुरक्षित करने के लिए उत्तराखण्ड जल संस्थान का राजकीयकरण किया जाना ही एक मात्र विकल्प है।

अतः हम अपना एक सूत्रीय मॉग पन आपको इस अनुरोध के साथ प्रेषित कर रहे है कि कृपया 15 दिवस के अन्तर्गत प्रमुखता से उत्तराखण्ड जल संस्थान का राजकीयकरण करवाने का कष्ट करेगें । यदि निर्धारित समयावधि के अन्तर्गत प्रबन्धक पक्ष द्वारा राजकीयकरण किये जाने हेतु कोई सकारात्मक कार्यवाही नही की जाती है तो संयुक्त मोर्चे द्वारा विवश हो कर आन्दोलनात्मक कार्यवाही अमल में लायी जायेगी, जिसकी समस्त जिम्मेदारी शासन, सरकार एवं प्रबन्धक पक्ष की होगी।

 

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