अभियंता संघ,पेयजल निगम ने MD,पेयजल निगम से की मुलाक़ात,की ये मांग
अभियंता संघ,पेयजल निगम ने MD,पेयजल निगम से की मुलाक़ात,की ये मांग
1. सीधी भर्ती के पदों पर नियुक्ति विगत 12 वर्षों से सीधी भर्ती के सहायक अभियन्ता (सिविल) तथा सहायक अभियन्ता (यांत्रिक) के पदों पर कोई भी भर्ती नहीं की गई है। वर्तमान में सीधी भर्ती के सहायक अभियन्ताओं के सभी पद रिक्त है। डिग्री प्राप्त दक्ष सहायक अभियन्ताओं की कमी के कारण विभाग के कार्यों में भी कठिनाई हो रही है तथा प्राक्कलन विरचन कार्यों भी सलाहकार (Consultant) के माध्यम से करवाने पड़ रहे है। जिससे विभाग को मिलने वाली 4 प्रतिशत प्रोजेक्ट फीस में भी नुकसान उठाना पड़ रहा अतः तत्काल सीधी भर्ती करने के सम्बन्ध में आवश्यक कार्यवाही की मांग की गई।

2. पेयजल निगम का राजकीयकरण विगत कई वर्षों से पेयजल निगम व जल संस्थान का एकीकरण करते हुए राजकीयकरण का मामला लम्बित है। पिछले वर्ष राज्य सरकार द्वारा पेयजल निगम कार्मिको का वेतन कोषागार से आहरण करने के बारे में भी आदेश जारी किया गाय था, परन्तु वर्तमान तक भी पेयजल निगम का राजकीयकरण नहीं किया गया है। वर्तमान में दोनों एजेन्सियों द्वारा योजनाओं का निर्माण एवं रखरखाव किया जा रहा है और राज्य की जनता को भी दो कार्यदायी संस्था होने के कारण अस्पष्टता और असमन्जस की स्थिति रहती है। अतः शीघ्र पेयजल निगम को राजकीय विभाग करवाने की मांग की गई।

3. योजनाओं का संचालन एवं रखरखाव जल जीवन मिशन कार्यक्रम के अंतर्गत बहुल ग्राम तथा पंपिंग पेयजल योजनाओं का संचालन नीति के अंतर्गत योजनाओ का संचालन रखरखाव उपभोक्ताओं से जलकर वसूली निर्माण कार्य करने वाली संस्था द्वारा ही किया जाएगा। अतः शहरी/ ग्रामीण क्षेत्र में किसी भी कार्यक्रम के अन्तर्गत उत्तराखंड पेयजल निगम द्वारा निर्मित / पुनर्गठित योजनाओं का रखरखाव संचालन तथा पेयजल उपभोक्ताओं से बिल की वसूली उत्तराखंड पेयजल निगम द्वारा किया जाए। वर्तमान में शहरी/ ग्रामीण क्षेत्र के अंतर्गत पेयजल योजनाओं का निर्माण / पुनर्गठन उत्तराखंड पेयजल निगम द्वारा किया गया है परंतु इन योजनाओं से संबंधित उपभोक्ताओं से बिलों के वसूली उत्तराखंड जल संस्थान द्वारा की जा रही है इस प्रकार की योजनाओं का संपूर्ण स्वामित्व उत्तराखंड पेयजल निगम को प्रदान किया जाए।
4. न्यू पेन्शन स्कीम के अन्तर्गत लाभान्वित होने वाले समस्त कार्मिकों एवं अभियन्ताओं को अवकाश नगदीकरण तथा ग्रेच्युटी इत्यादि की सुविधा अन्य राजकीय विभागों की भांति तत्काल अनुमन्य की जाये।
मकान भत्ते का भुगतान अन्य राजकीय विभाग के अनुसार किया जाये।
5. 6. मंहगाई भत्ता 50 प्रतिशत से अधिक हो जाने के कारण बेसिक आय में सम्मिलित होना चाहिये तदानुसार आवश्यक कार्यवाही की जाये।

