उत्तराखंड

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर स्पाइनल हेल्थ जागरूकता कार्यशाला का आयोजन

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर स्पाइनल हेल्थ जागरूकता कार्यशाला का आयोजन

देहरादून।अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर 7 मार्च 2026 को साई ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस, देहरादून में रीढ़ की हड्डी के स्वास्थ्य पर एक विशेष जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का नेतृत्व विशेषज्ञ डॉ. मनमीत कौर भल्ला ने किया। कार्यक्रम में विभागाध्यक्ष डॉ. मनीष झा, नर्सिंग कॉलेज की प्राचार्या डॉ. शीबा फिलिप, उप-प्राचार्य श्री रंजीथ थॉमस तथा साई इंस्टीट्यूट ऑफ पैरामेडिकल एंड एलाइड साइंसेज की प्राचार्या डॉ. संध्या डोगरा की गरिमामयी उपस्थिति रही।

कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं स्टाफ को रीढ़ की हड्डी के स्वास्थ्य के महत्व के प्रति जागरूक करना था। कार्यक्रम के दौरान डॉ. मनमीत कौर भल्ला ने बताया कि आधुनिक जीवनशैली, लंबे समय तक बैठकर कार्य करना और गलत शारीरिक मुद्रा के कारण कम उम्र में ही लोगों में पीठ और गर्दन से जुड़ी समस्याएं बढ़ती जा रही हैं।

उन्होंने प्रतिभागियों को सही बैठने और खड़े होने की मुद्रा, नियमित व्यायाम, योग तथा संतुलित जीवनशैली अपनाने की सलाह दी। साथ ही उन्होंने रीढ़ की हड्डी को स्वस्थ रखने के लिए कुछ सरल स्ट्रेचिंग और व्यायाम भी प्रदर्शित किए, जिन्हें दैनिक जीवन में आसानी से अपनाया जा सकता है।

कार्यक्रम के दौरान अन्य स्टाफ सदस्यों के साथ-साथ सभी विभागाध्यक्षों और फैकल्टी सदस्यों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और रीढ़ की हड्डी के स्वास्थ्य से संबंधित कई महत्वपूर्ण प्रश्न भी पूछे, जिनका विशेषज्ञों ने सरल एवं उपयोगी तरीके से उत्तर दिया।

कार्यक्रम के अंत में डॉ. संध्या डोगरा ने सभी की ओर से संस्थान के अध्यक्ष श्री हरिश अरोड़ा एवं उप-अध्यक्ष श्रीमती रानी अरोड़ा का हार्दिक आभार व्यक्त किया, जिनके निरंतर सहयोग और मार्गदर्शन से इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम का सफलतापूर्वक आयोजन संभव हो सका। उन्होंने कहा कि ऐसे जागरूकता कार्यक्रम विद्यार्थियों के स्वास्थ्य, जागरूकता और समग्र विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। कार्यक्रम का समापन सभी को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने और नियमित शारीरिक गतिविधि को अपनी दिनचर्या में शामिल करने के संदेश के साथ किया गया।

इस सफल आयोजन में श्रीमती सुनीता पंवार, श्रीमती रितिका तथा अन्य स्टाफ सदस्यों के साथ-साथ सभी विभागाध्यक्षों और फैकल्टी सदस्यों का विशेष योगदान रहा।

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