उत्तराखंड

अपना विशिष्ट आपदा प्रबंधन मॉडल बनाए उत्तराखण्डः मुख्य सचिव

अपना विशिष्ट आपदा प्रबंधन मॉडल बनाए उत्तराखण्डः मुख्य सचिव

एनजीओ, सिविल सोसाइटी, सामाजिक संस्थाओं एवं विशेषज्ञों के सुझाव भी लिए जाएं

आपदा जोखिम न्यूनीकरण में इंश्योरेन्स योजना जरूरी

जोखिम आंकलन के लिए तत्काल मास्टर ट्रेनर हेतु प्रशिक्षण के निर्देश

जिलाधिकारियों को सभी गांवों का आपदा जोखिम आंकलन करने के निर्देश

देहरादून। मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने आपदा प्रबन्धन के क्षेत्र में अन्य देशों एवं राज्यों के मॉडल को अपनाने के बजाय उत्तराखण्ड की विशेष परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए उत्तराखण्ड केन्द्रित आपदा प्रबन्धन मॉडल तैयार करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने आपदा प्रबन्धन विभाग को आपदाओं से निपटने एवं बचाव हेतु उत्तराखण्ड फ्रेमवर्क तैयार करने और इसके लिए एनजीओ, सिविल सोसाइटी, सामाजिक संस्थाओं एवं विशेषज्ञों के सुझाव भी इसमें शामिल करने को कहा। मुख्य सचिव श्रीमती राधा रतूड़ी ने बुधवार को सचिवालय में आपदा जोखिम न्यूनीकरण पर सेन्डई फ्रेमवर्क के राज्य में क्रियान्वयन की समीक्षा की। सचिव आपदा प्रबन्धन एवं पुनर्वास ने सेन्डई फ्रेमवर्क के बारे में जानकारी साझा की और आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में इसकी उपयोगिता के बारे में बताया।

बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्य सचिव ने आपदा जोखिम न्यूनीकरण में इन्श्योरेन्स योजना की प्रभावी कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आपदा संवेदनशील राज्य उत्तराखण्ड में लोगों को विशेषकर जरूरतमंदों को बीमा योजना से बड़ी मदद मिल सकती है। सीएस श्रीमती राधा रतूड़ी ने आपदा से प्रभावित क्षेत्रों एवं गांवों का जोखिम आकलन करने तथा जोखिम वाले भवनों तथा परिवारों का विस्थापन करने के निर्देश दिए। मुख्य सचिव ने पंचायती राज विभाग को जीपीडीपी प्लान में गांवों के आपदा जोखिम आकलन को भी शामिल करने के निर्देश दिए हैं।

मुख्य सचिव ने आपदा के सम्बन्ध में डायनॉमिक डेटा जुटाने के निर्देश दिए ताकि बेहतरीन नीति नियोजन में सहायता मिल सके। उन्होंने आपदा के आंकड़ों तक सभी विभागों की आसानी से पहुंच तथा वेबसाइट एवं कंट्रोल रूम में डेटा शेयरिंग के निर्देश दिए हैं। प्रदेशभर में उच्च आपदा जोखिम के दृष्टिगत चिन्हित गांवों की रिपोर्ट तलब करते हुए मुख्य सचिव श्रीमती राधा रतूड़ी ने अधिकारियों से ऐसे चिन्हित ग्रामों की पुनर्वास की कार्ययोजना की स्थिति स्पष्ट करने को कहा।

सचिव आपदा प्रबन्धन एवं पुनर्वास श्री विनोद कुमार सुमन ने जानकारी दी कि इस वित्तीय वर्ष में अभी तक 20 करोड़ रुपये की धनराशि जारी की जा चुकी है तथा व्यय की जा चुकी है। राज्य में आपदाओं के तहत सड़क हादसों में होने वाली सर्वाधिक मौतों पर चिन्ता व्यक्त करते हुए मुख्य सचिव ने सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए विशेष कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने क्रैश बैरियर विशेषकर बांस के क्रैश बैरियर लगाने जैसे इनोवेटिव प्रयासों को अपनाने के निर्देश दिए हैं।

बैठक में आईजी एसडीआरएफ श्रीमती रिद्धिम अग्रवाल, आईजी फायर श्री मुख्तार मोहसिन, अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रशासन श्री आनंद स्वरूप, अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी क्रियान्वयन डीआईजी श्री राजकुमार नेगी, संयुक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी मो0 ओबैदुल्लाह अंसारी, श्री पीडी माथुर आदि मौजूद थे।

यूएसडीएमए बनाएगा आपदा सखी-सीएस ने की सराहना

देहरादून। उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रशासन श्री आनंद स्वरूप ने मुख्य सचिव श्रीमती राधा रतूड़ी को बताया कि यूएसडीएमए आपदा मित्रों की तर्ज पर स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को आपदा सखी बनाने की योजना पर कार्य कर रहा है। मुख्य सचिव ने इस योजना की प्रशंसा करते हुए इसके सराहनीय कदम बताया। उन्होंने 65000 से अधिक महिला स्वयं सहायता समूहों, जिनसे 10 लाख से अधिक महिलाएं जुड़ी हैं, को भी आपदा प्रबन्धन का प्रशिक्षण देने के निर्देश दिए हैं।

आईआरएस प्रणाली पर व्यक्त की प्रसन्नता

देहरादून। उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी क्रियान्वयन डीआईजी श्री राजकुमार नेगी ने बताया कि उत्तराखण्ड ऐसा पहला राज्य है जहां पर राज्य, जिला, तहसील एवं पंयायत स्तर पर आईआरएस प्रणाली सक्रिय होने जा रही है। मुख्य सचिव ने इस पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए इसके लिए यूएसडीएमए को बधाई दी है।

पहली कक्षा से ही पढ़ाया जाए आपदा प्रबंधन

देहरादून। मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने राज्य में पहली कक्षा से ही हर बच्चे को आपदा प्रबन्धन की सामान्य जानकारी को अति आवश्यक बताते हुए पाठयक्रम में आपदा प्रबन्धन को शामिल करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही उन्होंने अधिकारियों को सैनिक कल्याण विभाग से सभी जिलों में रह रहे पूर्व सैनिकों की जानकारी एवं आंकड़े लेते हुए उन्हें आपदा प्रबन्धन का प्रशिक्षण देने के निर्देश दिए ताकि आपदा के समय उनकी सेवाओं और अनुभवों का लाभ लिया जा सके।

पर्वतीय क्षेत्रों में बनाए जाएं हल्के भवन

देहरादून। राज्य में भवनों एवं अन्य निर्माण कार्यों में भारी निर्माण सामग्री एवं भारी निर्माण कार्यों पर चिन्ता व्यक्त करते हुए मुख्य सचिव श्रीमती राधा रतूड़ी ने कहा कि आपदा संवेदनशील क्षेत्रों में अपेक्षाकृत हल्के निर्माण कार्यों को प्राथमिकता दी जाए ताकि आपदा के दौरान जानमाल की कम से कम हानि हो। उन्होंने सिंचाई विभाग सहित अन्य सम्बन्धित विभागों में इस सम्बन्ध में उत्तराखण्ड केन्द्रित कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए हैं जो कि राज्य की विशेष भौगोलिक स्थितियों एवं आपदा परिस्थितियों के अनुकूल हो।

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