उत्तराखण्ड डिप्लोमा इंजीनियर्स संघ, लो०नि०वि० ने दी कार्य बाहिष्कार की चेतावनी
उत्तराखण्ड डिप्लोमा इंजीनियर्स संघ लो०नि०वि० तथा उत्तराखण्ड डिप्लोमा इंजीनियर्स महासंघ के द्वारा अधिशासी अभियंता राष्ट्रीय राजमार्ग खण्ड श्रीनगर के विरूद्ध जिलाधिकारी गढवाल के द्वारा बिना कारण द्वेषपूर्ण कार्यवाही प्राथमिकी दर्ज करने का पुरजोर विरोध, प्राथमिकी वापस न लेने पर हो सकता है कार्य बहिष्कार।
राष्ट्रीय राजमार्ग सं० 07 पर फरासू नामक स्थान पर मार्ग बन्द होने तथा इस सम्बन्ध में जिलाधिकारी गढ़वाल के द्वारा अधिशासी अभियंता रा०रा० मार्ग खण्ड श्रीनगर के विरूद्ध प्राथमिकी दर्ज के करने के विरोध में संघ के द्वारा बैठक आहुत की गयी संघ के द्वारा जिलाधिकारी द्वारा किये गये उक्त द्वेषपूर्ण कार्यवाही का घोर विरोध किया गया।

विगत 10.09.2025 को राष्ट्रीय राजमार्ग सं० 07 पर फरासू नामक स्थान के पास राजमार्ग का भाग कोटेश्वर बांध की झील के बढते जलस्तर के कारण टूट गया था जिस कारण उक्त स्थान पर मार्ग यातायात हेतु बन्द हो गया था। उक्त मार्ग कई स्थानों पर डैम की झील के जलस्तर के लगातार बढ़ने के कारण क्षतिग्रस्त हो गया था। जिसकी जानकारी पूर्व से ही जिला प्रशासन को भी है। उक्त स्थान पर लगातार विभाग के प्रयासो तथा उपलब्ध मशीनें लगाकर लगभग 5 घंटे के अथक प्रयास के बाद खोल दिया गया था लेकिन जिलाधिकारी गढवाल के द्वेषपूर्ण तथा पूर्वाग्रह से ग्रसित होने के कारण रा०राजमार्ग के अधिशासी अभियंता श्री राजबीर चौहान के विरूद्ध जानबूझ कर विभिन्न धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर दी गयी है जिसका डिप्लोमा इंजीनियर्स संघ लो०नि०वि० तथा उत्तराखण्ड डिप्लोमा इंजीनियर्स महासंघ पुरजोर विरोध करता है। तथा संघ / महासंघ आशा करता है कि जिलाधिकारी गढ़वाल इस प्राथमिकी वापस लेने हेतु निर्देशित करेंगे ताकि सौहार्दपूर्ण वातावरण में आपदा से निपटा जा सके, अन्यथा संघ/ महासंघ को इस कृत्य के विरोध हेतु धरना, कार्यबहिष्कार जैसे कदम उठाने पर बाध्य होना पड़ेगा। वर्तमान में सम्पूर्ण भारतवर्ष बाढ-भूस्खलन से त्रस्त है। उत्तराखण्ड राज्य पहाड़ी प्रदेश होने कारण लगातार अतिवृष्टि होने के कारण अत्यधिक भूस्खलन से ग्रसित है तथा प्रकृति के विरूद्ध मानव बौना साबित हो रहा है। लेकिन जिलाधिकारी के पक्षपात एवं अदूरदर्शिता पूर्ण रवैये के कारण उन्ही अधिकारियों के विरूद्ध कार्यवाही की जा रही है जो प्रकृति के विरोध के बावजूद अपना सर्वस्व लगाकर जनता को सुविधा देने के लिए विगत 3 माह से दिन रात मार्गों को खोल कर सुविधाए प्रदान कर रहे है। ऐसी कार्यवाही अत्यधिक खेदजनक है।

इस सम्बन्ध यह तथ्य भी उल्लेखनीय है कि उक्त राष्ट्रीय राजमार्ग पूर्व में बी०आर०ओ० के पास था तथा स्वीत (कोटेश्वर) बांध निर्माण के दौरान इस मार्ग का वैकल्पिक मार्ग का निर्माण बी०आर०ओ० द्वारा इसके हिल साइड में कर दिया गया था जो ग्राम स्वीत से फरासू को जोड़ने हेतु बाईपास का निर्माण किया जा रहा था जिसमे 30 मीटर चौड़ाई में भूमिअधिग्रहण भी किया गया है लेकिन मार्ग लगभग मध्य बिन्दु पर ग्रामीणों के ऐतराज के कारण मार्ग पूर्ण नही बन पाया है। तत्समय अगर प्रशासन जागरूक व क्षमतावान होता तो भूमि का कब्जा बी०आर०ओ को दिया जाना चाहिए था ताकि मार्ग का पूर्ण निर्माण किया जा सकता था लेकिन तब प्रशासन ने कोई प्राथमिकी दर्ज नही की। उक्त वैकल्पिक मार्ग ग्राम स्वीत तथा ग्राम फरासू की ओर से दोनो तरफ से निर्मित हुआ है लेकिन एक स्थान पर विरोध के कारण आतिथि तक उक्त मार्ग जुड़ नही पाया है, और नही समस्या का समाधान हो पाया जिस कारण आज उक्त पुराना राजमार्ग डूबने के कगार पर है। उक्त स्थान पर मार्ग का सुरक्षात्मक कार्य/पुननिर्माण यदि हो भी जाता है तो झील से संलग्न लगभग 6 किमी मार्ग का क्या होगा उक्त मार्ग इस लम्बाई में भी झील के समानान्तर बना है और विगत कुछ दिन पहले बांध की झील का जलस्तर अत्यधिक बढने के कारण सिरोबगड से पूर्व गोवा बीच नामक स्थान पर मार्ग लगभग 200 मीटर लम्बाई में पूर्णत डूब गया था। अगर ऐसे ही छोटे-छोटे टुकडों में मार्ग के सुरक्षात्मक कार्य किये जायेगे तो उवत स्थिति 6 किमी लम्बाई में किसी भी स्थान पर पुनः आ सकती है।
अतः इस समस्या का स्थायी समाधान किसी अधिकारी की प्राथमिकी दर्ज करके चल नही होगा बल्कि पूर्व में निर्धारित मार्ग की भूमि का अधिग्रहण कर उसका कब्जा लो०नि०वि० को उपलब्ध कराया जाये ताकि वैकल्पिक मार्ग को ही स्थायी राजमार्ग बनाया जा सके। भूमि अधिग्रहण कार्य, जिला प्रशासन का ही कार्य है।
प्रशासन द्वारा कभी कोटेश्वर झील से सम्बन्धित कम्पनी को इस सम्बन्ध में प्रकरण के समाधान हेतु पत्राचार किया जाना चाहिए जो प्रतीत नही हो रहा है। आपदा प्रबन्ध निधि भी जिला प्रशासन के अन्तर्गत आती है यदि उवत स्थान पर पूर्व में आपदा का एहसास था तो आपदा प्रबन्धन निधि अथवा शासन स्तर को भी राजमार्ग खण्ड को धनावंटन शीघ्र किये जाने हेतु पत्राचार भी किया जा सकता था जो नही हुआ।
उवत के सम्बन्ध में सम्बन्धित खण्ड से प्राप्त सूचना के आधार पर यह भी अवगत कराना है कि राजमार्गो के आपदा ग्रसित क्षेत्रों के इन्वेस्टिगेशन तथा डी०पी०आर गठन हेतु भारत सरकार के राष्ट्रीय राजमार्ग मंत्रालय के द्वारा टी०एच०डी०सी० इण्डिया लि० को नामित किया गया है। उक्त स्थान पर मार्ग के सुरक्षात्मक कार्य उपायों हेतु टी०एच०डी०सी० इण्डिया लि० के द्वारा इन्वेस्टिगेशन के उपरान्त डी०पी०आर गठित की जा चुकी है जो गठित कर उच्चाधिकारियों को स्वीकृति हेतु प्रेपित की जा चुकी है। तथा उक्त स्थान पर बन्द होने की सम्भावना को देखते हुए हिल साइड में भी अतिरिक्त पहाड़ कटान हेतु मशीनें कार्यरत थी। उक्त स्थान अतिसंवेदनशीन है क्योंकि नीचे से झील का पानी राजमार्ग को काट रहा है तथा हिल साइड में भूस्खलन क्षेत्र होने के कारण उवत स्थान पर मार्ग निर्माण किये जाने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जिलाधिकारी महोदया द्वारा उक्त तकनीकी एवं जटिल स्थितियों का संज्ञान न लेकर सीधे प्राथमिकी दर्ज करवायी गयी जो कि आपत्तिजनक एवं द्वेपपूर्ण है। ऐसी तानाशाही कार्यवाही का संघ के सदस्य पुरजोर विरोध करते है तथा जिलाधिकारी महोदया से प्राथमिकी वापस लेने हेतु अनुरोध करते है। अगर द्रेपपूर्ण कार्यवाही समाप्त नही की जाती है तो संघ के समस्त सदस्य कार्य बहिष्कार हेतु बाध्य होंगे तथा राजमार्गों को खुला रखने की जिम्मेदारी संघ के सदस्यों की नही होगी। अतः शासन तथा जिला प्रशासन उवत स्थितियों का संज्ञान लेंगे ताकि प्रकरण का निस्तारण जनहित में यथाशीघ्र किया जा सके।
अतः उ०डि०इ०संघ लो०नि०वि०/ उत्तराखण्ड डि०इं० महासंघ, जिलाधिकारी गढवाल महोदया को उवत प्राथमिकी वापस लेने हेतु अनुरोध करते है। प्राथमिकी वापस न होने की स्थिति में संघ / महासंघ के सभी सदस्य कार्य बहिष्कार हेतु बाध्य होगे। जिसकी सम्पूर्ण जिम्मेदारी शासन/प्रशासन की होगी।

