उत्तराखंड

उत्तराखंड विद्युत अधिकारी -कर्मचारी संयुक्त संगठन ने किया भूमि हस्तानांतरण का विरोध

उत्तराखंड विद्युत अधिकारी -कर्मचारी संयुक्त संगठन ने किया भूमि हस्तानांतरण का विरोध

शासन से आदेश रद्द करने की मांग की

आंदोलन की भी दी चेतावनी

संगठन की महत्वपूर्ण बैठक आज अध्यक्ष युद्धवीर सिंह तोमर और पंकज सैनी (अध्यक्ष विद्युत डिप्लोमा इंजीनियर्स एसोसिएशन) के नेतृत्व में हुई

देहरादून।आज  विद्युत भवन डाकपत्थर पर उत्तराखंड विद्युत अधिकारी कर्मचारी संयुक्त संघर्ष मोर्चा की केंद्रीय कार्यकारिणी की सभा आयोजित की गई। आज की सभा में मोर्चा के सभी घटक संगठनों के अध्यक्ष महामंत्री एवं मोर्चा के प्रांतीय संयोजक , ऊर्जा के अध्यक्ष उपस्थित रहे।सभा की अध्यक्षता अभियंता संघ के अध्यक्ष तथा संयुक्त मोर्चा के अध्यक्ष इंजीनियर युद्धवीर सिंह तोमर तथा संचालन पंकज सैनी ने किया।

आज की सभा में मोर्चा के संयोजक इंसारूल हक,हाइड्रोइलेक्ट्रिक एंप्लाइज यूनियन के अध्यक्ष केहर सिंह, उत्तरांचल बिजली कर्मचारी संघ के अध्यक्ष देवेंद्र शर्मा, लेखा संघ के अध्यक्ष श्री डीएस रावत, विद्युत डिप्लोमा इंजीनियर्स एसोसिएशन के महासचिव भानु प्रकाश जोशी, ऊर्जा आरक्षितवर्ग एसोसिएशन से बीरबल सिंह ,राकेश शर्मा अमित रंजन, बृजेश यादव, दिग्विजयरावत, राजेश तिवारी, याकूब अली,मो० रियाज, अभिलाष यादव, वेदपाल आर्य ,भारत भूषण गैरोला, संजय सत्संगी, सुब्रत सिंनहा, सुभाष, रुखसार, रेनू तोमर रिंकी तोमर, साक्षी चौहान ,सीमारानी, रितु पुलकित, सुनील कुमार, आनंद शर्मा, अरुण कुमार, मनवर सिंह खाती ,विनीत सैनी, सुधीर कुमार ,एक सिंह, चित्रा रानी, के साथ सैकड़ो कर्मचारी उपस्थित थे।

मोर्चा की बैठक में कर्मचारी संगठनों ने एक सूत्र से मांग की की डाकपत्थर की जल विद्युत निगम की बहुमूल्य भूमि जो परियोजना कार्यों के लिए आवंटित है तथा जिसमें अनेक विद्यालय, व्यापारिक संस्थान बैंक , पावर हाउस ऑफिस,आवश्यक सेवा संस्थान जैसे फायर ब्रिगेड, विभिन्न कार्यालय स्थित है के विषय में किया गया शासन आदेश तत्काल रद्द कियाजाए। आज की बैठक में मांग की गई की निगमो में पूर्णकालिक प्रबंध निदेशक एवं निदेशक नियुक्त किए जाएं। मोर्चा की बैठक में संगठनों में स्पष्ट कर दिया कि मोर्चा द्वारा प्रबंध निदेशक को नोटिस के माध्यम से 15 दिन का समय दिया गया है उसकी समाप्ति के पश्चात आंदोलन मुख्यालय पर किया जाएगा। इस प्रकार के अन्याय पूर्ण शासनादेश को रद्द न किया गया तो कर्मचारी हड़ताल तक दी जा सकते हैं।

 

 

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