उत्तराखंड

08 मार्च को देहरादून में ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन की राष्ट्रीय कार्य समिति की बैठक — इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 और बिजली के निजीकरण पर होगी विस्तृत चर्चा

08 मार्च को देहरादून में ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन की राष्ट्रीय कार्य समिति की बैठक — इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 और बिजली के निजीकरण पर होगी विस्तृत चर्चा

देहरादून।ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन की राष्ट्रीय कार्य समिति की महत्वपूर्ण बैठक 08 मार्च 2026 को देहरादून में हो रही है जिसमे फेडरेशन के चेयरमैन श्री शैलेंद्र दुबे व सेक्रेटरी पी रत्नाकर राव मौजूद रहेंगे। उन्होंने बताया कि देहरादून में आयोजित होने वाली इस राष्ट्रीय कार्य समिति की बैठक में देश के लगभग 18 राज्यों से विद्युत अभियंता संघों के अध्यक्ष, महासचिव तथा अन्य पदाधिकारी भाग लेने के लिए पहुंच रहे हैं। कई राज्यों के प्रतिनिधि देहरादून पहुंच भी चुके हैं।

यह जानकारी देते हुए एसोसिएशन के अध्यक्ष ई० युद्धवीर तोमर और महासचिव राहुल चानना ने बताया कि बैठक में केंद्र सरकार द्वारा संसद के बजट सत्र में लाए जा रहे इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 तथा देश और राज्यों में चल रही बिजली के निजीकरण की प्रक्रिया पर विस्तृत चर्चा की जाएगी और आगे की रणनीति पर महत्वपूर्ण निर्णय लिए जाएंगे।

उन्होंने बताया कि 10 मार्च को संसद में इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 पेश किए जाने की खबर से पूरे प्रदेश के बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों में भारी आक्रोश है।

देहरादून में आयोजित हो रही फेडरेशन की राष्ट्रीय कार्य समिति की बैठक में इस विषय पर व्यापक चर्चा होगी और आंदोलन की आगे की रणनीति तय की जाएगी।

उन्होंने कहा कि बैठक में इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 तथा प्रस्तावित नेशनल इलेक्ट्रिसिटी पॉलिसी 2026 के विरोध में एक सशक्त प्रस्ताव पारित किया जाएगा, जैसा फेडरेशन ने अवगत कराया है। फेडरेशन का मानना है कि इन नीतियों के माध्यम से देश के बिजली क्षेत्र में निजीकरण को बढ़ावा देने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे बिजली उपभोक्ताओं, किसानों, कर्मचारियों और इंजीनियरों पर गंभीर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा बिजली वितरण कंपनियों के निजीकरण को बढ़ावा देने के लिए वित्तीय सहायता को विभिन्न शर्तों से जोड़ना भी अत्यंत आपत्तिजनक है। इस मुद्दे पर भी राष्ट्रीय कार्य समिति की बैठक में विस्तार से विचार-विमर्श किया जाएगा।

एसोसिएशन का मानना है कि बिजली क्षेत्र में निजीकरण की नीतियां न केवल कर्मचारियों और इंजीनियरों के हितों के खिलाफ हैं बल्कि किसानों और आम बिजली उपभोक्ताओं के लिए भी गंभीर संकट पैदा करेंगी। इसलिए इस विषय पर व्यापक राष्ट्रीय स्तर पर संघर्ष की रूपरेखा तैयार की जाएगी।

 

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