उत्तराखण्ड जूनियर हाईस्कूल,जाखणीधार, टिहरी ने पीएम मोदी और मुख्यमंत्री धामी को लिखा पत्र
सेवा में,
माननीय मुख्यमंत्री जी उत्तराखण्ड सरकार, देहरादून
द्वाराः- उप जिलाधिकारी जाखणीधार, टिहरी गढ़वाल।
विषयः- प्रदेशीय जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ उत्तराखण्ड की प्रमुख मांगो / समस्याओं के निस्तारण हेतु मांग पत्र। महोदय,
प्रदेशीय जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संगठन आप से निम्नांकित प्रमुख ज्वलन्त समस्याओं के निस्तारण करने हेतु निवेदन करता है-
1:- माननीय उच्चतम न्यायालय के द्वारा 1 सितम्बर 2025 के निर्णय के क्रम में 2011 से पूर्व नियुक्त सभी शिक्षकों को टीईटी परीक्षा से मुक्त रखने के लिए प्रदेश की विधान सभा से प्रस्ताव पारित कर शिक्षकों को टीईटी परीक्षा से छूट प्रदान करने हेतु भारत सरकार से संसद में अध्यादेश लाकर कानून बनाने की मांग की जाय, जिससे शिक्षकों की सेवा सुरक्षित रखते हुए मानसिक तनाव से मुक्त रखा जाय।
2:- जूनियर हाईस्कूल / प्रारम्भिक शिक्षक सवंर्ग का त्रिस्तरीय पी०आर०टी०, टी०जी०टी०, पी०जी०टी० कैडर जनपद / मण्डल कैडर के साथ विकल्प के आधार पर सेवा शर्तों को जोड़ा जाय तथा एल०टी० समायोजन/ त्रिस्तरीय कैडर हेतु विभाग-द्वारा शासन को भेजे गए ड्रॉफ्ट में संघ द्वारा संशोधन हेतु दिये गये सुझावों को सम्मिलित करते हुये त्रिस्तरीय कैडर व्यवस्था को शीघ्र लागू किया जाय। अथवा उच्चीकृत जूनियर हाईस्कूलों सहित प्रदेश में संचालित समस्त जूनियर हाईस्कूलों में छात्र हित को मध्यनजर रखते हुए प्रधानाध्यापक व अंग्रेजी विषय के शिक्षक सहित 5 पदों के साथ पृथक इकाई के रुप में संचालित किये जायें ।
3:-वित्त विभाग के शासनादेश सं० 395 तथा शिक्षकों के लिए निर्गत शासनादेश सं0 74 के अनुसार ब्लाक के आहरण वितरण अधिकारियों द्वारा 4600 ग्रेडवेतन प्राप्त शिक्षकों को 17140 पर निर्धारित कर व जनपदों में वित अधिकारियों के जांचोंपरान्त कोषागार के द्वारा प्रदेश के जूनियर हाईस्कूलों के सहायक अध्यापकों को 4600 ग्रेडवेतन प्राप्त शिक्षकों को 01 अप्रैल, 2009 से वेतनमान रू0 17140/- का वास्तविक लाभ दिया जा चुका है। प्रदेश के अशासकीय जूनियर हाईस्कूल के शिक्षकों को 17140 का लाभ दिया जा रहा है, जबकि राजकीय जूनियर हाईस्कूलों के शिक्षकों का कार्य एवं दायित्व अशासकीय जूनियर हाईस्कूल के विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों के समान है। समानकार्य के लिए समानवेतन के सिद्वान्त के अनुपालन में राजकीय जूनियर हाईस्कूलों के शिक्षकों को 4600 ग्रेडवेतन प्राप्त तिथि से रू0 17140 वेतनमान दिया जाना न्याय संगत है। भारत सरकार कार्यालय ज्ञाप 8-23/2017 दि० 28.09.2018 जोकि पदोन्नति से 4600 ग्रेड वेतन प्राप्त शिक्षकों के लिए निर्गत किया गया है। भारत सरकार के कार्यालय ज्ञाप में नोशनली (काल्पनिक) व्यवस्था का’ प्राविधान नहीं किया गया है। किन्तु वित्त अनुभाग के शासनादेश संख्या 317 दिनांक 28.12.2018 के अनुसार बिन्दु संख्या 06 में नोशनली (काल्पनिक) व्यवस्था का पुनः प्राविधान किया गया है, जोकि त्रुटिपूर्ण है। उक्त शासनादेश से नोशनली टी००टी० उत्तीर्ण करने के लिए स्नातक कक्षाओं में पात्रता मानक 50 प्रतिशत अंक अनिवार्य से है एवं आयु सीमा 40 वर्ष है। माननीय सुप्रीमकोर्ट के दिशा-निर्देशों में 55 वर्ष तक के शिवको टी उत्तीर्ण करने के आदेश दिये हैं जो तार्किक एवं न्याय संगत नहीं है।
– वर्तमान में उत्तराखण्ड राज्य में इस आदेश से प्रभावित शिक्षक-शिक्षिकाओं की आयु 40 से 55 वर्ष के बीच में कार्य समय-समय पर पठन-पाठन के साथ-साथ कराये जाते हैं। साथ ही नौकरी से वंचित रहने का खतरा है। वह पारिवारिक जिम्मेदारियों सहित विभागीय कार्यों में अत्यधिक उलझे रहते हैं। विभाग द्वारा अनेक अतिरिक्त लगातार बने रहने से तनावग्रस्त भी हैं ऐसी स्थिति में अधिक उम्रदराज शिक्षकों का दो वर्ष में टी०ई०टी० क्रमश: उत्तीर्ण करना असम्भव प्रतीत होता है।
4- माननीय सुप्रीमकोर्ट के दिशा-निर्देशों में यह भी उल्लेखित है कि वर्ष 2017 में केन्द्र सरकार के एन०सी०टी०ई० द्वारा धारा-23 की उपधारा 02 ‘क’ में सेवारत प्रारम्भिक शिक्षकों के लिए 04 वर्षों में अनिवार्य सम से टी०ई०टी० पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण करने का संशोधन कर दिशा-निर्देश जारी किये गये हैं, जबकि उत्तराखण्ड विद्यालयी शिक्षा विभाग द्वारा अभी तक 8 वर्ष बीत जाने के बाद भी उक्त पर कोई दिशा-निर्देश नहीं दिये गये हैं। यदि समय से राज्य सरकार/विभाग द्वारा दिशा-निर्देश दिये होते तो अधिकतम शिक्षक टी०ई०टी० पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण कर चुके होते। अपनी शैक्षिक योग्यता में अभिवृद्धि कर चुके होते जो शिक्षकों के प्रति विभाग की घोर लापरवाही हैं।
5:- एन०सी०टी०ई० के द्वारा 23 अगस्त, 2010 को प्रारम्भिक शिक्षकों की नियुक्ति की अर्हता निर्धारित की गयी है, जिसमें टी०ई०टी० की अनिवार्यता का प्राविधान किया गया है। यह प्राविधान 23 अगस्त, 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षक/शिक्षिकाओं पर बाध्यकारी न हो, इस सम्बन्ध में आर०टी०ई० एक्ट की धारा-23 (2) में संशोधन किया जाय। जब तक संशोधन नहीं हो जाता है, तब तक इस सम्बन्ध में अध्यादेश लाया जाय, जिससे शिक्षक / शिक्षिकाओं की पदोन्नति एवं सेवा सम्बन्धि शर्तों पर किसी प्रकार की कठिनाई उत्पन्न न हो।
अतः प्रदेशीय जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ उत्तराखण्ड उपरोक्त सभी बिन्दुओं पर आप से सहानुभूतिपूर्वक विचार करने का अनुरोध करता है। जिससे पूरे देश के साथ उत्तराखण्ड के भी हजारों उम्रदराज शिक्षक व उनके परिवारजन नौकरी जाने के खतरे से लगातार तनावग्रस्त हैं, साथ ही भविष्य में जीवन यापन के लिए आंशकित है। इस स्थिति को मध्यनजर रखते हुए, शिक्षकों को टी०ई०टी० पात्रता परीक्षा की अनिवार्यता से मुक्त रखने का प्रदेश संगठन आपसे विनम्र निवेदन करता है।
प्रदेशीय जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ जाखणीधार, टिहरी गढ़वाल उत्तराखण्ड आपका आभारी रहेगा।
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सेवामें,
माननीय प्रधानमंत्री जी भारत सरकार, नई दिल्ली-110011
द्वाराः- उप जिलाधिकारी जाखणीधार, टिहरी गढ़वाल।
विषयः- माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिनांक 01 सितम्बर, 2025 को किए गए निर्णय के क्रम में देश के सेवारत शिक्षक/शिक्षिकाओं के लिए टी०ई०टी० (शिक्षक पात्रता परीक्षा) अनिवार्य किए जाने पर उक्त आदेश को मानवीय दृष्टि के आधार पर निरस्त किए जाने हेतु माननीय सर्वोच्च न्यायालय से अपील एवं आपके माध्यम से देश के शिक्षक / शिक्षिकाओं के भविष्य एवं सेवा को सुरक्षित किए जाने हेतु सरकार द्वारा शिक्षक/शिक्षिकाओं के हित में हस्तक्षेप कर उनके भविष्य को संरक्षित एवं सुरक्षित किए जाने के संबंध में।
आदरणीय महोदय,
उपरोक्त विषयक मा० सुप्रीमकोर्ट ने प्रारम्भिक शिक्षकों को सेवा में अविरल बने रहने तथा पदोन्नति हेतु 55 वर्ष तक के अनिवार्य टी०ई०टी० परीक्षा उत्तीर्ण करने का निर्णय दिया गया है, और यह भी उल्लेखित किया है कि दो वर्षों के अंतराल में कार्यरत प्रारम्भिक शिक्षकों को टी०ई०टी० परीक्षा अनिवार्य रूप से उत्तीर्ण करना होगा अन्यथा की स्थिति में उन्हें अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी जायेगी। उक्त निर्णय से उत्तराखण्ड राज्य के लगभग 15,000 से 30,000 शिक्षक/शिक्षिकाएँ प्रभावित हो रहे हैं, जिसके कारण वर्तमान में शिक्षक व उनके परिवारजन तनावग्रस्त है। साथ ही भविष्य में जीवन यापन के लिए आंशकित है, उक्त निर्णय से प्रारम्भिक शिक्षक कुछ विशेष बिन्दुओं को आपके संज्ञान में लाना चाहते हैं। जो निम्नवत् हैं-
1:- पूरे भारतवर्ष सहित उत्तराखण्ड राज्य में एन०सी०टी०ई० के दिशा निर्देशों के क्रम में 23 अगस्त, 2010 को आर०टी०आई० (शिक्षा का अधिकारअधिनियम) लागू करने के निर्देश हुए। उत्तराखण्ड राज्य में भी 2011 से पूर्णतः लागू कर प्रारम्भिक शिक्षक भर्ती में टी०ई०टी० पात्रता परीक्षा का प्राविधान अनिवार्य किया गया, तदुपरान्त वर्तमान तक यह प्रक्रिया गतिमान है
2:- वर्ष 2011 से पूर्व नियुक्त प्रदेश के समस्त प्रारम्भिक शिक्षकों को जिनकी प्रशिक्षण योग्यता बी० टी० सी० /सी०पी०एड० / बी०एड० / बी०पी०एड० के साथ शैक्षिक योग्यता इण्टरमीडिएट एवं स्नातक थी, जबकि 2011 के को हटा कर शिक्षकों को वेतन वसुली से मुक्त किया जाय। 01.01.2006 के बाद चयन वेतनमान (4600 पेड प्राप्त करने वाले शिक्षकों को भी रू0 17140/- का लाभ दिया जाय। 4600 ग्रेडवेतन प्राप्त शिक्षकों को शासन प्राप्त तिथि से 17140 वेतनमान ले रहा है। अतः सरकार को 17140 वेतनमान देने पर किसी भी प्रकार का व्ययभार नहीं. ने 17140 वेतनमान देना स्वीकार करते हुए 28.12.2018 से देने का आदेश निर्गत किया है। जबकि शिक्षक 4600 ग्रेडवेतन पड़ रहा है।
4- उत्तराखण्ड शासन के कार्मिक एवं सतर्कता अनुभाग-2 के आदेश सं0 344/xxx(2)/2021-30 (21) 2021 दिनांक 12 अक्टूबर, 2021 के क्रम में प्रधानाध्यापक एवं सहायक अध्यापकों को पूर्ण सेवाकाल में 03 पदोन्नतियां दी जानी सुनिश्चित की जाय।
5:-प्रदेश के समस्त जूनियर हाईस्कूलों में पांचवां पद अंग्रेजी विषय का अनिवार्य रुप से सृजित किया जाय। जिसका प्रस्तावपूर्व में शासन को प्रेषित एवं शासन में विचाराधीन है।
6:-प्रदेश के शिक्षक कार्मिकों को पुरानी पेंशन व्यवस्था को बहाल किया जाय तथा 2005 में पूरे प्रदेश के लिए जारी एक ही जारी विज्ञप्ति के आधार पर नियुक्त 7 जनपदों के शिक्षकों को पुरानी पेंशन से आच्छादित कर दिया गया है, शेष 6 जनपद (टिहरी, उत्तरकाशी, देहरादून, पौड़ी, हरिद्वार, और रूद्रप्रयाग) को छोड दिया गया है। एक ही विज्ञप्ति के आधार पर नियुक्त प्रदेश के समस्त शिक्षकों की पुरानी पेंशन स्वीकृत की जाय।
7:- माध्यमिक विद्यालय के शिक्षकों की भांति प्रारम्भिक / जूनियर हाईस्कूल के शिक्षकों को भी सम्पूर्ण सेवाकाल में एक बार अन्तर्जनपदीय स्थानान्तरण की सुविधा अनुमन्य किया जाय।
8:-शिक्षकों के सातवें वेतनमान के बाद स्वीकृत चयन प्रोन्नत वेतनमान तथा पदोन्नति पर एक वेतनवृद्धि दिये जाने का शासनादेश निर्गत किया जाय।
9:- प्रदेश में समग्र शिक्षा के अन्तर्गत संचालित विद्यालयों में कार्यरत समस्त शिक्षकों का आहरण वितरण अधिकारी उप शिक्षा अधिकारियों को नियुक्त किया जाय।
10:-राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण के अन्तर्गत शिक्षक एवं कार्मिकों को ओ०पी०डी० सहित केन्द्र के समान दरों पर निःशुल्क चिकित्सा सुविधा अनुमन्य किया जाय।
11:-विद्यालयी शिक्षा के अंतर्गत प्रारम्भिक शिक्षा संवर्ग के वार्षिक खेल प्रतियोगिता के आयोजन हेतु संकुल स्तर पर कम से कम रु 75000, विकासखंड स्तर पर रु 150000 और जनपद स्तर पर रु 300000 की धनराशि आवंटित की जाय। जिससे राज्य के निर्धन प्रतिभावान छात्र-छात्राओं को खेल प्रतियोगिताओं में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करने का सुअवसर प्राप्त हो सके। साथ ही प्रारम्भिक शिक्षा संवर्ग के राज्य स्तरीय खेल बैठकों तथा राज्य खेल प्रतियोगिताओं के आयोजनों में संगठन के पदाधिकारियों को अनिवार्य रूप से आमन्त्रित किया जाय।
12:-प्रारम्भिक शिक्षा में पूर्व से नियुक्त सी.पी.एड. प्रशिक्षण प्राप्त शिक्षकों को एल.टी. व्यायाम के 30 प्रतिशत विभागीय पदोन्नति/समायोजन के पदों पर समायोजित करने हेतु एल टी सेवा नियमावली में संशोधन कर एल टी व्यायाम के पदों पर नियुक्त होने का अवसर प्रदान किया जाय। सी.पी.एड प्रशिक्षित कार्यरत प्रारम्भिक शिक्षक विगत 25-30 वर्षों से बेसिक शिक्षा क्रीडा प्रतियोगिताओं सहित प्रारम्भिक शिक्षा के विद्यालयों के बच्चों को जनपद / राज्य/भारतवर्ष के खेल प्रतियोगियों में बेहतर प्रदर्शन करवाने में सफल रहे है।
13:-वर्षों से पदोन्नति न होने के फलस्वरूप चयन/प्रोन्नत वेतनमान से 5400 ग्रेडवेतन प्राप्त करने वाले शिक्षकों को बोनस भुगतान किया जाय अन्यथा की स्थिति में लिपिक संवर्ग की भांति उन्हें राजपत्रित अधिकारी घोषित किया जाय।
पत्र लिखने वालों में वालों में ब्लॉक अध्यक्ष श्री जयपाल गुसाईं ,ब्लॉक मंत्री शैलेन्द्र मैठाणी,प्रांतीय महामंत्री श्री जगवीर खरोला,ब्लॉक संरक्षक श्री गुणानन्द पांडेय,ब्लॉक कोषाध्यक्ष श्रीमती उर्मिला शाह,ब्लॉक संयुक्त मंत्री श्रीमती अंजू बाला,श्री बृजपाल सिंह रावत,श्री धर्म सिंह नेगी,रमेश नेगी,कुलबीर चौहान,संगीता बिजल्वाण,आशा राणा,संगीता पंवार,अरविंद शाह,केदार सिंह,मदन मोहन चमोली,रमेश भट्ट,जसपाल रावत,सुनीता बहुगुणा,जगदीप बिष्ट आदि उपस्थित रहे।


