मजदूर आंदोलन और भगत सिंह के विचारों पर उत्तराखंड पावर इंजीनियर्स एसोसिएशन ने किया संगोष्ठी का आयोजन
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मजदूर आंदोलन और भगत सिंह के विचारों पर उत्तराखंड पावर इंजीनियर्स एसोसिएशन ने किया संगोष्ठी का आयोजन
देहरादून। अखिल भारत नागरिक परिषद के तत्वावधान में शहीद-ए-आजम भगत सिंह की जयंती के अवसर पर देहरादून में ‘मजदूर आंदोलन और भगत सिंह’ विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन उत्तराखंड पावर इंजीनियर्स एसोसिएशन की ओर से किया गया।
संगोष्ठी में ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन शैलेन्द्र दुबे मुख्य वक्ता के रूप में शामिल हुए। संगोष्ठी के मुख्य अतिथि उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड के प्रबंध निदेशक पी सी ध्यान और उत्तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड के प्रबंध निदेशक ए के सिंह थे।
अपने संबोधन में शैलेन्द्र दुबे ने कहा कि भगत सिंह केवल एक महान क्रांतिकारी ही नहीं, बल्कि मजदूरों, किसानों और शोषित वर्गों के अधिकारों के प्रखर विचारक भी थे। उनके क्रांतिकारी विचारों का एक महत्वपूर्ण पक्ष मजदूरों और किसानों को संगठित कर उन्हें राजनीतिक एवं सामाजिक परिवर्तन की शक्ति बनाना था।
मुख्य अतिथि श्री पी०सी० ध्यानी प्रबन्ध निदेशक यूपीसीएल एंव पिटकुल ने कहा कि ब्रिटिश सरकार के ट्रेड डिस्प्यूट्स बिल और पब्लिक सेफ्टी बिल जैसी दमनकारी नीतियों के विरोध में भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त ने 8 अप्रैल 1929 को केंद्रीय विधानसभा में बम फेंका था। इसका उद्देश्य किसी व्यक्ति की हत्या करना नहीं, बल्कि ब्रिटिश शासन को मजदूरों और जनता के अधिकारों के दमन के विरुद्ध चेतावनी देना था।
शैलेन्द्र दुबे ने कहा कि साइमन कमीशन के विरोध के दौरान लाला लाजपत राय पर हुए लाठीचार्ज और बाद में उनकी मृत्यु ने भगत सिंह और उनके साथियों को गहरे रूप से प्रभावित किया। इसके बाद भगत सिंह और राजगुरु ने ब्रिटिश पुलिस अधिकारी जे० पी० सॉन्डर्स की हत्या कर लाला लाजपत राय की मृत्यु का बदला लेने का प्रयास किया।
अति विशिष्ट अतिथि श्री ए०के० सिंह प्रबन्ध निदेशक यूजेवीएन लि० ने कहा कि नौजवान भारत सभा का उद्देश्य युवाओं, मजदूरों और किसानों को संगठित करना तथा एक स्वतंत्र, लोकतांत्रिक और शोषणमुक्त समाज की स्थापना के लिए संघर्ष करना था। भगत सिंह का स्पष्ट विचार था कि जब तक किसानों और मजदूरों को राजनीतिक सत्ता में वास्तविक भागीदारी नहीं मिलेगी, तब तक देश का पूर्ण विकास संभव नहीं है।
शैलेन्द्र दुबे ने कहा कि भगत सिंह के लिए राजनीतिक स्वतंत्रता का अर्थ केवल सत्ता परिवर्तन नहीं था, बल्कि आर्थिक और सामाजिक स्वतंत्रता भी उसका अभिन्न हिस्सा थी। छोटी-छोटी आर्थिक मांगों और अधिकारों के लिए होने वाले संघर्ष मजदूरों को आगे चलकर अपने व्यापक राजनीतिक अधिकारों के प्रति जागरूक और संगठित करते हैं।
संयुक्त मोर्चा के संयोजक श्री इंसारूल हक ने कहा कि आज भी देश के विभिन्न हिस्सों में मजदूर आंदोलनों के बीच “इंकलाब जिंदाबाद” का नारा संघर्ष और परिवर्तन की चेतना का प्रतीक बना हुआ है। भगत सिंह के विचार में इंकलाब का अर्थ केवल हिंसक परिवर्तन नहीं, बल्कि ऐसी सामाजिक व्यवस्था का निर्माण था जिसमें पुरानी शोषणकारी व्यवस्था समाप्त होकर एक बेहतर और न्यायपूर्ण व्यवस्था के लिए रास्ता तैयार हो।प्रसिद्ध कवि अतुल शर्मा जी ने भगत सिंह जी के विषय में अपनी प्रस्तुति दी।
संगोष्ठी में मुख्य अतिथि UPCL के प्रबंध निदेशक पी.सी. ध्यानी तथा ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन शैलेन्द्र दुबे रहे। विशिष्ट अतिथियों में यूजेवीएनएल के प्रबंध निदेशक ए.के. सिंह, सचिवालय संघ के अध्यक्ष दीपक जोशी, उत्तराखंड पावर इंजीनियर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष इं. कार्तिकेय दुबे, महासचिव मुकेश कुमार और पूर्व अध्यक्ष युद्धवीर तोमर शामिल रहे।
उत्तरांचल पावर इंजीनियर्स एसोसिएशन ने कहा कि भगत सिंह के विचार आज भी मजदूरों, किसानों और मेहनतकश जनता के अधिकारों तथा सामाजिक-आर्थिक न्याय के संघर्ष को नई दिशा देने वाले हैं। आज के कार्यक्रम में उत्तरांचल पावर इंजीनियर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष इं० कार्तिकेय दुबे, महासचिव इं०मुकेश कुमार, अनिल मिश्रा,अमित रंजन, गौरव शर्मा रेखा डंगवाल , सी के पांडे, भारत भूषण गैरोला, हिमांशु अवस्थी, निशा रानी, मनीषा कौनसवाल, तथा उत्तराखंड विद्युत अधिकारी कर्मचारी संयुक्त संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष इं० युद्धवीर सिंह तोमर, संयोजक इंसारूल हक, विनोद कवि ,पंकज सैनी, सुनील तंवर, चित्र, सिंह, एचएस रावत, बीरबल सिंह भानु जोशी, गोविंद नौटियालआदि पदाधिकारी तथा विभिन्न स्थानों से आए अभियंता अधिकारी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में सचिवालय संघ के अध्यक्ष दीपक जोशी तथा अन्य कर्मचारी संगठनों के पदाधिकारी उपस्थित रहें।
