हरियाणा में समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस पर रोक, उत्तरांचल पावर इंजीनियर्स एसोसिएशन ने किया फैसले का स्वागत
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हरियाणा में समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस पर रोक, उत्तरांचल पावर इंजीनियर्स एसोसिएशन ने किया फैसले का स्वागत
एसोसिएशन अध्यक्ष कार्तिकेय दुबे और महासचिव मुकेश कुमार ने हरियाणा ऊर्जा विभाग के कर्मचारियों को दी बधाई,
उपभोक्ता हितों और सरकारी बिजली निगमों की वित्तीय स्थिरता को बताया महत्वपूर्ण
देहरादून। हरियाणा सरकार द्वारा राज्य में समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस के सृजन, संचालन और क्रियान्वयन पर रोक लगाने के निर्देश जारी किए जाने का उत्तरांचल पावर इंजीनियर्स एसोसिएशन ने स्वागत किया है। एसोसिएशन के अध्यक्ष कार्तिकेय दुबे और महासचिव मुकेश कुमार ने इस निर्णय को जनहित, उपभोक्ता हितों तथा सरकारी बिजली वितरण निगमों की वित्तीय स्थिरता की दृष्टि से महत्वपूर्ण कदम बताया है। दोनों पदाधिकारियों ने हरियाणा ऊर्जा विभाग के कर्मचारियों को इस निर्णय के लिए बधाई भी दी।
हरियाणा सरकार ने विद्युत अधिनियम, 2003 की धारा 108(1) के तहत हरियाणा विद्युत नियामक आयोग को निर्देश जारी कर राज्य में समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस के सृजन, संचालन और क्रियान्वयन पर रोक लगाने का निर्णय लिया है। सरकार की ओर से जारी पत्र के अनुसार, ये निर्देश मुख्यमंत्री की स्वीकृति से जारी किए गए हैं। इस फैसले का प्रमुख उद्देश्य बिजली वितरण व्यवस्था में व्यापक जनहित की रक्षा करना और सरकारी बिजली वितरण निगमों की वित्तीय स्थिति को सुरक्षित बनाए रखना है।
बिजली वितरण निगमों ने उठाए थे कई अहम सवाल
समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस की व्यवस्था को लेकर राज्य के बिजली वितरण निगमों की ओर से कई महत्वपूर्ण आपत्तियां उठाई गई थीं। इनमें संबंधित कंपनी की वित्तीय क्षमता, तकनीकी तैयारियों और सभी श्रेणियों के उपभोक्ताओं को निर्बाध बिजली उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी जैसे विषय प्रमुख रहे। इसके अलावा, अधिक राजस्व देने वाले उपभोक्ताओं को चुनने और कम राजस्व वाले उपभोक्ताओं की जिम्मेदारी मौजूदा सरकारी वितरण निगमों पर बने रहने की आशंका भी जताई गई थी।
इन आशंकाओं के मद्देनजर बिजली वितरण व्यवस्था में प्रतिस्पर्धा के संभावित प्रभावों के साथ-साथ सरकारी बिजली वितरण निगमों की आर्थिक स्थिति पर पड़ने वाले असर को लेकर भी चिंता व्यक्त की गई थी। माना जा रहा है कि सरकार के इस कदम से जुड़े नीतिगत पहलुओं पर विचार करते समय उपभोक्ताओं और सार्वजनिक क्षेत्र के बिजली निगमों के हितों को विशेष महत्व दिया गया है।
किसानों, आम उपभोक्ताओं और कर्मचारियों के हितों पर जोर
हरियाणा सरकार का यह निर्णय ऐसे समय में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जब बिजली वितरण क्षेत्र में आर्थिक स्थिरता, सभी उपभोक्ताओं को समान रूप से बिजली उपलब्ध कराने और वितरण व्यवस्था की जवाबदेही को लेकर लगातार चर्चा होती रही है। बिजली वितरण निगमों को प्रत्येक श्रेणी के उपभोक्ता तक बिजली पहुंचाने, नेटवर्क का रखरखाव करने और आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने की जिम्मेदारी निभानी होती है।
ऐसे में समानांतर लाइसेंस व्यवस्था के संभावित प्रभावों को लेकर किसानों, आम उपभोक्ताओं और बिजली विभाग के कर्मचारियों के बीच उत्पन्न आशंकाओं को भी सरकार के फैसले के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सरकारी वितरण निगमों की वित्तीय स्थिति मजबूत रहना बिजली आपूर्ति के बुनियादी ढांचे, नेटवर्क के विस्तार और सेवाओं के संचालन के लिए आवश्यक है।
नीतिगत फैसलों में जनहित सर्वोपरि रखने की अपील
उत्तरांचल पावर इंजीनियर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष कार्तिकेय दुबे और महासचिव मुकेश कुमार ने कहा कि बिजली क्षेत्र में नीतिगत निर्णय लेते समय उपभोक्ताओं के हितों, सरकारी बिजली वितरण निगमों की वित्तीय स्थिरता और सार्वजनिक क्षेत्र की मजबूती को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने हरियाणा सरकार के फैसले का स्वागत करते हुए ऊर्जा विभाग के कर्मचारियों को बधाई दी।
एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने उम्मीद जताई कि बिजली क्षेत्र से जुड़े भविष्य के नीतिगत निर्णय भी व्यापक जनहित को ध्यान में रखकर लिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि बिजली वितरण व्यवस्था केवल राजस्व और प्रतिस्पर्धा तक सीमित विषय नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध आम जनता, किसानों और उद्योगों को विश्वसनीय बिजली उपलब्ध कराने से भी है।
उत्तरांचल पावर इंजीनियर्स एसोसिएशन ने इस घटनाक्रम को सार्वजनिक क्षेत्र के बिजली वितरण निगमों की भूमिका और उनकी वित्तीय मजबूती से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय बताते हुए कहा कि उपभोक्ता हितों की रक्षा तथा बिजली व्यवस्था की दीर्घकालिक स्थिरता किसी भी नीतिगत निर्णय के केंद्र में होनी चाहिए।





