CM धामी महार रेजीमेंट में पिता को याद कर भावुक हुए,बचपन की यादें ताजा की
देहरादून।उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मध्य प्रदेश के सागर में आज महार रेजीमेंट सैनिक सम्मेलन में भाग लिया। इस दौरान उन्होंने महार रेजीमेंट सेंटर में पौधरोपण कर अपने स्वर्गीय पिता को किया याद।इस दौरान सीएम पुष्कर सिंह धामी भावुक हो गए थे। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के पिता शेर सिंह धामी महार रेजीमेंट में ही थे।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि बाल्यकाल में जब वे अपने (स्वर्गीय) पिताजी से महार रेजीमेंट के वीर सैनिकों की शौर्यगाथाओं के बारे में सुनते थे तो मन में उत्साह और उमंग की भावना हिलोरे लेने लगती थी।यह उनका सौभाग्य है कि आज उन्हें वीर सैनिकों के बीच आने का सुअवसर प्राप्त हुआ है।इससे पूर्व वह यहां एक बालक के रूप में आये थे, जिसके लिए ये पूरा परिवेश किसी स्वप्नलोक से कम नहीं था।बाल्यकाल में जिस दिन वह सागर आये वो उनके जीवन के सबसे महत्वपूर्ण दिनों में से एक दिन था।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जहां एक ओर हमारी यह रेजीमेंट विविधता में एकता की भावना का बोध कराती है, वहीं इसका प्रत्येक सैनिक भारत की महान संस्कृति एवं गौरवशाली सैन्य परंपरा का एक उत्कृष्ट उदाहरण भी है।आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सेना के मान और सम्मान बढ़ा है।
उन्होंने कहा कि आज हमारे वीर सैनिक दुश्मन को उसके घर में घुस कर जवाब दे रहे हैं।जब भी दुश्मन ने ललकारा है, भारत ने उसे मुंह तोड़ जवाब देते हुए दिखा दिया है कि उसके पास ताकत भी है और उचित जवाब देने की राजनीतिक इच्छाशक्ति भी है।भारत वैश्विक मंचों पर पूरी दृढ़ता और अपने हितों को सर्वोपरि रखते हुए अपनी बात रख रहा है।आज दुनिया ये जान रही है, समझ रही है कि यह देश अपने हितों से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं करने वाला है।
मुख्यमंत्री ने महार रेजीमेंट के वॉर मेमोरियल में शहीदों को श्रद्धांजलि भी दी, उन्होंने वार मेमोरियल का अवलोकन किया।मुख्यमंत्री ने महार रेजीमेंट सेंटर में वृक्षारोपण कर स्वर्गीय पिता को याद कर किया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के पिता स्वर्गीय शेर सिंह धामी महार रेजीमेंट में सेवाएं चुके हैं।मुख्यमंत्री ने कहा कि आज वह सेना में तो नही हैं, परन्तु वीर सैनिकों को अपना आदर्श मानकर राष्ट्र सेवा में अपना यथासंभव योगदान देने की पूरी कोशिश कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि भारतीय सेना के सैन्य कौशल और पराक्रम का इतिहास महार रेजिमेंट के बिना पूर्ण नहीं हो सकता।देश की पहली मशीनगन रेजीमेंट होने के साथ साथ देश को दो सेना प्रमुख देने का गौरव भी इस रेजीमेंट के साथ जुड़ा हुआ है।सीमाओं की सुरक्षा करने से लेकर युद्ध के मैदान तक महार रेजिमेंट का एक-एक सैनिक अपना सर्वोच्च बलिदान देने के लिए हमेशा तत्पर रहा है।1962 का युद्ध हो या 1971 का… हमारे वीर जवानों ने हमेशा अपनी वीरता का परिचय देते हुए दुश्मन को मात दी है।
मुख्यमंत्री ने ”ऑपरेशन पवन” के नायक रहे महार रेजीमेंट के अमर शहीद मेजर रामास्वामी परमेश्वरन और देश के भीतर आतंकियों से लोहा लेते हुए अमर बलिदान देने वाले सूबेदार मेजर सुरेश चंद यादव को नमन करते हुए कहा कि महार रेजिमेंट में ऐसे वीरों की लंबी श्रृंखला है, जिन्होंने मां भारती के यश को अक्षुण्ण रखने हेतु अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया और तिरंगे की आन-बान और शान को फीका नहीं पड़ने दिया। उन्होंने कहा कि हमारे प्रत्येक सैनिक की वीरता, साहस और बलिदान पर हर एक नागरिक को गर्व है। आप सभी हमारे आदर्श हैं और आपकी वीरता, साहस पर इस राष्ट्र को अभिमान है।
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी मध्य प्रदेश के दौरे पर हैं। मध्य प्रदेश के सागर में महार रेजीमेंट सैनिक सम्मेलन में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रतिभाग किया। इस दौरान उन्होंने महार रेजिमेंट के अधिकारियों और जवानों को संबोधित भी किया और अपने पिता से जुड़ी कुछ यादों को उनके साथ शेयर की।

