बड़ी खबर: असिस्टेंट इंजीनियरों की BLO नियुक्ति पर उठे सवाल, चुनाव आयोग के दिशानिर्देशों का उल्लंघन बताया

0
IMG_20250808_191704

बड़ी खबर: असिस्टेंट इंजीनियरों की BLO नियुक्ति पर उठे सवाल, चुनाव आयोग के दिशानिर्देशों का उल्लंघन बताया

देहरादून।उत्तराखंड सिंचाई अभियंता एसोसिएशन ने राज्य में असिस्टेंट इंजीनियरों (Group-B, Pay Level-10) की बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) के रूप में नियुक्ति पर कड़ा ऐतराज़ जताया है। संघ ने इस संबंध में मुख्य निर्वाचन अधिकारी, देहरादून को पत्र भेजकर इन नियुक्तियों को चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों का “गंभीर उल्लंघन” करार दिया है।

राज्य में आगामी विधानसभा चुनावों के लिए BLO की नियुक्ति के तहत कुछ असिस्टेंट इंजीनियरों को इस भूमिका में लगाया गया है, जबकि वे राज्य सेवा के उच्च वेतनमान और पदाधिकार स्तर (Group-B, Level-10) के अधिकारी हैं। संघ का कहना है कि ये अधिकारी केंद्र सरकार के Group-A स्तर के समकक्ष अधिकारी माने जाते हैं और इन्हें BLO की जिम्मेदारी देना उनकी वरिष्ठता, गरिमा और संवैधानिक अधिकारों के खिलाफ है।

क्या हैं आपत्तियाँ?

नियमों का उल्लंघन: चुनाव आयोग की 2010 की गाइडलाइन्स में BLO के लिए सुझाए गए पदों में असिस्टेंट इंजीनियर शामिल नहीं हैं।

वरिष्ठ अधिकारियों को कनिष्ठों के अधीन किया गया: BLO के रूप में तैनात इंजीनियरों को जूनियर इंजीनियर, गन्ना पर्यवेक्षक, संग्रह अमीन जैसे ग्रुप-C अधिकारियों के अधीनस्थ बनाया गया है, जो चयन प्रक्रिया और वेतनमान में काफी नीचे हैं।

मतदाता पंजीकरण का उल्लंघन: कई नियुक्त BLO उस क्षेत्र के मतदाता ही नहीं हैं, जिसकी ज़िम्मेदारी उन्हें दी गई है। यह भी आयोग के नियमों का उल्लंघन है।

संघ की मांग

उत्तराखंड सिंचाई अभियंता एसोसिएशन के महासचिव इं एच.सी. सिंह द्वारा हस्ताक्षरित पत्र में मांग की गई है कि:

इन नियुक्तियों की तत्काल समीक्षा कर निरस्त किया जाए।

भविष्य में ऐसे सभी मामलों में यह सुनिश्चित किया जाए कि वरिष्ठ अधिकारी को किसी कनिष्ठ या अधीनस्थ सेवा में नियुक्त न किया जाए।

प्रोटोकॉल, गरिमा और प्रशासनिक अनुशासन को बनाए रखने के लिए चुनाव आयोग के नियमों का सख्ती से पालन हो।

यह मुद्दा अब सिर्फ नियुक्तियों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह प्रशासनिक संरचना, सेवा सम्मान और चुनाव आयोग के नियमों की गंभीर अनदेखी का मामला बन गया है। एसोसिएशन ने स्पष्ट किया है कि अगर इन आदेशों को वापस नहीं लिया गया, तो यह भविष्य में चुनावी तैयारियों में बाधा उत्पन्न कर सकता है।

उपरोक्त प्रकरण मुख्य निर्वाचन आयुक्त, भारत, नई दिल्ली को भी निराकरण हेतु सादर प्रेषित किया गया है।

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *