यमुना परियोजना तथा लखवाड परियोजना की भूमि को अन्य कार्यों में प्रयुक्त होने पर मोर्चा का आंदोलन जारी
यमुना परियोजना तथा लखवाड परियोजना की भूमि को अन्य कार्यों में प्रयुक्त होने पर मोर्चा का आंदोलन जारी
देहरादून।आज दिनांक 7जनवरी 2026 को उत्तराखंड विद्युत अधिकारी कर्मचारी संयुक्त संघर्ष मोर्चा की एक बैठक उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन मुख्यालय पर आयोजित कीगई।बैठक की अध्यक्षता श्री केहर सिंह , तथा संचालन मोर्चा के संयोजक इंसारूल हक के द्वारा किया गया।
आज की बैठक में मोर्चा के द्वारा उत्तराखंड जल विद्युत निगम द्वारा डाकपत्थर परियोजना की विभिन्न बिल्डिंग स्टोर्स तथा भूमि को यूआईडीबी को हस्तांतरित करने के शासन आदेश के विषय में विस्तृत चर्चा की गई तथा इसके अतिरिक्त पिछले चार-पांच वर्षों से तीनों ऊर्जा निगमो के प्रबंधन द्वारा कर्मचारियों से जुड़ी समस्याओं पर कोई भी कार्यवाही नहीं किए जाने पर चर्चा हुई।
बैठक में सभी घटक संगठनों ने स्पष्ट किया कि यमुना परियोजना प्रथम एवं द्वितीय के अंतर्गत 6 विद्युत ग्रह निरंतर ऊर्जा उत्पादन में लगे हैं तथा इसके अतिरिक्त मान्य प्रधानमंत्री तथा गृह मंत्री के द्वारा महत्वपूर्ण घोषित लखवाड बांध परियोजना के विभिन्न कार्यालय तथा परिचालन एवं अनुरक्षण में तैनात कर्मचारियों के , कार्यालय, स्टोर्स, टेस्टिंग लैब तथा आवास निर्मित किए गए हैं। गलत सूचनाओं के आधार पर उक्त परियोजना की भूमि को अन्य विभाग को हस्तांतरित करने के आदेश किए गए हैं। इसके विषय में मोर्चा ने जल विद्युत निगम प्रबंध निदेशक को पूर्व में आंदोलन नोटिस दिया है एवं पिछली वार्ता में बनी सहमति के आधार पर अभी तक प्रमुख सचिव ऊर्जा के साथ कोई वार्ता इस विषय पर नहीं हुई है। अतः मोर्चा प्रतिनिधिमंडल ने उत्तराखंड जल विद्युत निगम के प्रबंध निदेशक डॉ संदीप सिंघल, तथा निगम के समस्त निर्देशकों की उपस्थिति में से इस विषय में वार्ता की तथा सभी संगठनों ने एकमत से स्पष्ट कर दिया अगर इस विषय में कोई भी कार्यवाही की गई तो मोर्चा उसी समय से अनिश्चितकालीन आंदोलन प्रारंभ कर देगा।
आज की बैठक में मोर्चा अध्यक्ष यशवीर सिंह तोमर, श्री प्रदीप कंसल, सुनील मोगा, पंकज सैनी राजवीर सिंह, बीरबल सिंह, राकेश शर्मा, चित्र सिंह, डीएस रावत, राहुल चांनना,सुनील तंवर सुभाष, कलम सिंह चौहान, भानु प्रकाश जोशी, अशोक सैनी आदि उपस्थित रहे।,
मोर्चे की बैठक में तीनों ऊर्जा निगमों के कार्मिकों की विभिन्न समस्याओं पर कोई कार्रवाई न होने के कारण शीघ्र ही पूरे राज्य में आंदोलन का नोटिस प्रेषित करने का निर्णय लिया गया। जिसमें मुख्य रूप से तीनों ऊर्जा निगम में शासन की भांति पुरानी पेंशन का लाभ दिया जाना, शासन की भांति ग्रेच्युटी 20 से बढ़कर 25 लाख करने, वर्ष 2020 के बाद नियुक्त कार्मिकों को टैरिफ सुविधा प्रदान करने,टीजी-2, एवं अन्य 2600 ग्रेड वेतन के कार्मिकों को प्रथम एसीपी 4600 का लाभ दिए जाने,उपनल संविदा कार्मिकों को समान कार्य समान वेतन तथा नियमितीकरण की मांग की गई। मोर्चा की बैठक में तीनों ऊर्जा निगमो में रिक्त पड़े समस्त पदों निदेशक, प्रबंध निदेशक आदि पर तत्काल पूर्णकालिक स्थाई नियुक्ति करने की मांग की गई।
आज की बैठक में मोर्चा के द्वारा प्रबंध निदेशक जल विद्युत निगम को अवगत करा दिया गया कि इस विषय में कोई भी कार्यवाही किए जाने से पहले मोर्चा की बैठक निगम अध्यक्ष तथा प्रमुख सचिव ऊर्जा से कराई जाए अन्यथा की स्थिति में आंदोलन प्रारंभ कर दिया जाएगा। मोर्चा का स्पष्ट मत है कि निर्माणाधीन एवं कार्यरत जल विद्युत परियोजनाओं हेतु आवंटित भूमि एवं कार्यालय पर विभिन्न वित्तीय संस्थानों वर्ल्ड बैंक, पीएफसी, केंद्र सरकार से ऋण लेकर बनाए गए विभिन्न भवन एवं संस्थान को भूमि सहित ट्रांसफर किए जाने से राज्य की जनता पर अनावश्यक भार पड़ेगा तथा इस पर लगाया गया धन अपव्यय होगा इसके अतिरिक्त परियोजना में विभिन्न ,स्कूल, मंदिर गुरुद्वारा तथा अस्पताल आदि स्थित है, इसके अतिरिक्त लाखों की संख्या में नागरिक जो आसपास के क्षेत्र में निवास करते हैं उनके लिए विभिन्न सुविधाएं स्थापित की गई हैं|गलत सूचना प्रदान करते हुए राज्य की लोकप्रिय सरकार को बदनाम करने के लिए इस प्रकार की अनावश्यक योजना लाई जा रही है जिससे विद्युत उत्पादन तो बाधित होगा ही साथ में क्षेत्र में विभिन्न प्रकार के असंतुलन उत्पन्न होंगे|

