ऊर्जा निगम कर्मियों ने UPCL मुख्यालय के गेट में कार्य बहिष्कार करते हुए धरना दिया
ऊर्जा निगम कर्मियों ने UPCL मुख्यालय के गेट में कार्य बहिष्कार करते हुए धरना दिया
देहरादून।उत्तराखंड विद्युत अधिकारी कर्मचारी संयुक्त संघर्ष मोर्चा के द्वारा दिए गए आंदोलन नोटिस के अनुपालन तथा *नेशनल कॉर्डिनेशन कमेटी ऑफ़ इलेक्ट्रिसिटी एम्प्लॉयज़ एव इंजीनियर्स* के द्वारा इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 का कड़ा विरोध किए जाने के निर्णय के फल स्वरुप इस विषय में आज उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन मुख्यालय पर कार्य बहिष्कार करते हुएएक विशाल गेट सभा का आयोजन किया गया ।
राष्ट्रव्यापी आवाहन के अंतर्गत आज 10 मार्च को देशव्यापी “लाइटनिंग एक्शन” का पालन करते हुए मुख्यालय तथा राज्य के सभी जल विद्युत परियोजनाओं,विद्युत संस्थान, विद्युत उत्पादन पावर हाउस, डिस्ट्रीब्यूशन, ट्रांसमिशन सिस्टम के विभिन्न बिजली घर पर अनुरक्षण एवं सामान्य पाली के कार्मिकों के द्वारा कार्य बहिष्कार करते हुए गेट मीटिंग/ विरोध सभा का आयोजन किया गया।
आज की देहरादून में आयोजित सभा की अध्यक्षता इंजीनियर कार्तिकेय दुबे तथा संचालन श्री विनोद कवि के द्वारा किया गया। सभा में वक्ताओं ने केंद्र सरकार द्वारा संसद के बजट सत्र में इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 को प्रस्तुत कर पारित कराने की प्रस्तावित योजना पर गहरी चिंता और कड़ा आक्रोश व्यक्त किया गया।
उत्तराखंड विद्युत अधिकारी कर्मचारी संयुक्त संघर्ष मोर्चा के संयोजक इंसारूल हक और अध्यक्ष इंजीनियर युद्धवीर सिंह तोमर ने बताया कि बिजली कर्मचारी-इंजीनियर संगठनों, किसान संगठनों तथा उपभोक्ता समूहों सहित विभिन्न हितधारकों द्वारा बड़े पैमाने पर आपत्तियां और सुझाव दिए जाने के बावजूद सरकार इस बिल को बिना पर्याप्त चर्चा और लोकतांत्रिक परामर्श के आगे बढ़ाने का प्रयास कर रही है।
मोर्चा ने कहा कि जब सरकार ने स्वयं इस बिल पर सुझाव आमंत्रित किए थे, तो यह उसकी जिम्मेदारी थी कि वह पारदर्शिता के साथ बताए कि प्राप्त आपत्तियों और सुझावों पर क्या विचार किया गया और उन्हें किस प्रकार संबोधित किया गया। इन आपत्तियों की अनदेखी कर जल्दबाजी में कानून लाने का प्रयास लोकतांत्रिक प्रक्रिया को कमजोर करता है।
आज की सभा में श्री राहुल चांनना, प्रदीप कंसल,केहर सिंह, पंकज सैनी, सुनील तंवर,राजवीर सिंह, कल्पना डोभाल,आशीष, बीरबल सिंह, चित्र सिंह, एचएस रावत सुनील मोगा, शैलेंद्र सिंह, डी एस नेगी,अमित रंजन, रेखा डंगवाल, रविंद्र प्रताप सिंह, गोविंद नौटियाल, अनुज कुमार, प्रणव सी के पांडे, प्रदीप प्रकाश शर्मा, अमित रंजन, अनुपमा, एस के टम्टा, विकास गुप्ता ,गौरव, अमित राघव, अनिल नौटियाल, घनश्याम शर्मा, नीरज उनियाल, तेजपाल रावत, शीला बोरा, प्रवेश कुमार, एचएस रावत, तारा रानी, वीरेंद्र नेगी, प्रवेश कुमार, एवं अन्य सैकड़ो कर्मचारियों में प्रतिभाग किया।
मोर्चा के द्वारा उत्तराखंड के तीनों ऊर्जा निगमो के प्रबंधन को ऊर्जा निगमों में पिछले 4 वर्ष से लंबित कार्मिकों की समस्याओं के विषय में 19 सूत्रीय समस्या पत्र कई माह पहले दिया गया था किंतु उस पर अभी तक कोई कार्यवाही अथवा वार्ता आयोजित कर समाधान नहीं किया गया। इस क्रम में मोर्चा के द्वारा आज आंदोलन कार्यक्रम के प्रथम दिन पूरे राज्य में गेट मीटिंग आयोजित की गई तथा 13 मार्च एवं 17 मार्च को गेट मीटिंग के माध्यम से विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। इसके पश्चात भी समस्याओं का समाधान नहीं किए जाने पर पूरे राज्य के ऊर्जा कार्मिक दिनांक 27 मार्च को उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन मुख्यालय पर एकदिवसीय सत्याग्रह कार्यक्रम आयोजित करेंगे। इसी क्रम में दिनांक 6 अप्रैल 2026 को उत्तराखंड जल विद्युत निगम मुख्यालय पर एक दिवसीय सत्याग्रह तथा तत्पश्चात मध्य रात्रि से पूर्ण हड़ताल का आवाहन किया गया है।
मोर्चा ने दोहराया कि प्रस्तावित इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 और नेशनल इलेक्ट्रिसिटी पॉलिसी 2026 बिजली क्षेत्र में बड़े पैमाने पर निजीकरण को तेज करने के उपकरण प्रतीत होते हैं। मोर्चा ने चेतावनी दी कि ऐसी नीतियां सार्वजनिक बिजली व्यवस्था को कमजोर करेंगी और इसका प्रतिकूल प्रभाव बिजली कर्मचारियों, किसानों और आम उपभोक्ताओं पर पड़ेगा।
बैठक में बिजली क्षेत्र में तेज़ी से बढ़ाए जा रहे निजीकरण पर भी गंभीर चिंता व्यक्त की गई। वितरण कंपनियों के निजीकरण को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार द्वारा राज्यों को दी जाने वाली वित्तीय सहायता को इक्विटी निजीकरण, प्रबंधन नियंत्रण निजी कंपनियों को देने तथा डिस्कॉम को स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध करने जैसी शर्तों से जोड़ना जबरन निजीकरण थोपने का प्रयास बताया गया।
उत्तराखंड विद्युत अधिकारी कर्मचारी संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने उत्तराखंड सरकार द्वारा उत्तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड (UJVNL) के डाकपत्थर और ढालिपुर स्थित जल विद्युत परियोजनाओं की 76.73 हेक्टेयर भूमि को उत्तराखंड इंफ्रास्ट्रक्चर एंड इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट बोर्ड के माध्यम से निजी क्षेत्र को आवंटित करने के निर्णय का भी कड़ा विरोध किया गया। सभी घटक संगठनों ने चेतावनी दी कि जल विद्युत परियोजनाओं के लिए सुरक्षित भूमि को अन्य प्रयोजनों में हस्तांतरित करना लखवाड, किशाऊ तथा यमुना बेसिन की अन्य महत्वपूर्ण परियोजनाओं के विकास को गंभीर रूप से प्रभावित करेगा और इसका प्रदेश के सभी बिजली कार्मिक, अवर अभियंता, अभियंता और कर्मचारी जोरदार विरोध करेंगे।
इन परिस्थितियों को देखते हुए मोर्चा ने आज 10 मार्च 2026 को देशव्यापी “लाइटनिंग एक्शन” का आह्वान किया है। यदि सरकार संसद में इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल प्रस्तुत करती है तो देशभर के बिजली अभियंता और कर्मचारी कार्य बहिष्कार करेंगे और अपने कार्यालयों तथा परियोजना स्थलों के बाहर व्यापक प्रदर्शन करेंगे।
मोर्चा इस आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए नेशनल कोऑर्डिनेशन कमेटी ऑफ इलेक्ट्रिसिटी इंप्लाइज एंड इंजीनियर्स (NCCOEEE) तथा अन्य बिजली क्षेत्र के संगठनों के साथ मिलकर राष्ट्रीय स्तर पर संघर्ष को तेज करेगा।
आज की बैठक में मोर्चा ने प्रदेश के सभी बिजली अभियंताओं और कर्मचारियों से आह्वान किया कि वे एकजुट रहें और बिजली क्षेत्र, कर्मचारियों, किसानों और उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए संघर्ष के लिए तैयार रहें।
मोर्चा के प्रमुखबिंदु
विद्युत सुधार अधिनियम 2025 को रद्द किया जाए।
यमुना परियोजना की डाकपत्थर स्थित भूमि का हस्तांतरण रद्द किया जाए।
तीनों ऊर्जा निगम में कार्यरत उपनल कार्मिकों को समान कार्य समान वेतन तथा नियमितीकरण का लाभ तत्काल प्रदान कियाहै।
वर्ष 2020 के बाद नियुक्त कार्मिकों को विद्युत टैरिफ सुविधा पूर्व की भांति प्रदान की जाए।
2600 ग्रेड वेतन में नियुक्त कार्मिकों को तृतीय एसीपी पूर्व की भांति 6600 ग्रेड वेतन तथा चतुर्थ श्रेणी को 4600 ग्रेड वेतन का लाभ प्रदान किया जाए।
नियुक्ति पर मिलने वाली प्रारंभिक वेतन वृद्धि का लाभ सहायक अभियंता,अवर अभियंता, टेक्नीशियन को दिया जाये।
tg2 तथा tg1 के पदों को एक करते हुए एक पदनाम टेक्नीशियन किया जाए।
इसकी अतिरिक्त मोर्चा के समस्या पत्र में दी गई सभी समस्याओं पर जब तक वार्ता अथवा समाधान नहीं होता तब तक मोर्चा का आंदोलन कार्यक्रम जारी रहेगा।

