उत्तराखंड

उत्तराखंड विद्युत अधिकारी कर्मचारी संयुक्त संघर्ष मोर्चा की सचिव ऊर्जा के साथ महत्वपूर्ण बैठक हुई

देहरादून।उत्तराखंड विद्युत अधिकारी कर्मचारी संयुक्त संघर्ष मोर्चा के द्वारा तीनों ऊर्जा निगमों के प्रबंध निदेशकों को दिए गए कार्यक्रम के अनुसार दिनांक 21 जनवरी से प्रारंभ हो रहे जन जागरण एवं आंदोलन कार्यक्रम के प्रारंभ होने से पहले दिनांक 20 जनवरी 2026 को मोर्चा की वार्ता प्रमुख सचिव ऊर्जा की अध्यक्षता में तथा प्रबंध निदेशक उत्तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड निदेशक मंडल के सदस्यो की उपस्थिति में संपन्न हुई।

मोर्चा की ओर से मोर्चा अध्यक्ष वाईएस तोमर संयोजक इंसारूउल हक, सहसंयोजक प्रदीपकंसल , राजवीर सिंह, पंकज सैनी, राकेश शर्मा, डीएस रावत, भानु प्रकाश जोशी सम्मिलित रहे।

मोर्चा द्वारा ऊर्जा निगम प्रबंधन को 19 सूत्रीय समस्या पत्र दिया गया है जिसमें चरणबद्ध, जन जागरण,ध्यानाकर्षण कार्यक्रम तथा तत्पश्चात 7 अप्रैल 2026 से आम हड़ताल की सूचना दी गई है।
कल की वार्ता में मुख्य रूप से उत्तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड के जल विद्युत परियोजनाओं संबंधित भूमि एवं संरचनाओं को दिनांक 3 दिसंबर 2025 को नियोजन विभाग के द्वारा निर्गत किए गए शासन आदेश के माध्यम से उत्तराखंड निवेश एवं संवर्धन बोर्ड को हस्तांतरित करने के विषय में हुई।

बैठक में मोर्चा के द्वारा प्रमुख सचिव ऊर्जा तथा प्रबंधन को अवगत कराया गया कि जिस भूमि एवं संरचनाओं को आदेश के माध्यम से हस्तांतरित करने के आदेश किए गए हैं उस पर वर्तमान में ऊर्जा उत्पादन कर रही परियोजनाओं तथा महत्वपूर्ण राष्ट्रीय परियोजना लखवाड डैम, किशाऊ डैम के निर्माण संबंधित गतिविधियां चल रही हैं। इसके अतिरिक्त एक विस्तृत तथ्य पत्र मोर्चा के द्वारा माननीय मुख्यमंत्री महोदय मुख्य सचिव तथा प्रमुख सचिव ऊर्जा को दियागया।

इस तथ्य पत्र में वर्तमान स्थान पर स्थापित विद्युत उप संस्थान ट्रांसमिशन लाइन अन्य संरचनाओं का विवरण तथा इस हस्तांतरण के कारण होने वाली हानि एवं विद्युत उत्पादन एवं )विद्युत ग्रिड परिचालन की समस्याओं को अवगत कराते हुए मोर्चा के द्वारा मांग की गई है कि शासन आदेश को निरस्त किया जाए तथा इस विषय में ऊर्जा विशेषज्ञ तथा संगठनों के सदस्यों को सम्मिलित करते हुए एक समिति के माध्यम से पहले वस्तु स्थिति एवं तथ्य जानकारी लिए जाएं। जल विद्युत परियोजना के यमुना घाटी में बनाए गए विभिन्न स्ट्रक्चर भवन कार्यालय वर्कशॉप लैब आवास स्कूल आदि यमुना परियोजना स्टेज फर्स्ट और सेकंड के अंतर्गत निर्मित किए गए हैं। जिसमें मुख्य रूप से यमुना पर बैराज , भूगर्भ विद्युत गृह छिबरो,खोदरी ,वयासी,ढालीपुर, ढकरानी,कुलहाल, आसनबैराज आदि स्थित है।

सरकार का लखवाड, किसाऊ परियोजनाओं को पूरा करने का लक्ष्य अति शीघ्र है किंतु इस प्रकार के आदेश के माध्यम से इन परियोजनाओं के निर्माण एवं अन्य परियोजनाओं के परिचालन में बाधा उत्पन्न होगी। बन रहे बांधों के कारण पुनर्वास की समस्या भी भूमि के हस्तांतरण सेबढ़ेगी। इसके अतिरिक्त इस भूमि में प्रतिबंधित प्रजाति के वृक्ष आदि भी खड़े हैं, जिनको काटने से पर्यावरण संबंधी समस्या उत्पन्न होगी। जल विद्युतपरियोजना की भूमि को अन्य व्यावसायिक कार्यों में प्रयोग करने से नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के आदेशों की अवहेलना की भी संभावना है
मोर्चा ने वार्ता के पक्ष अपनी बैठक में निर्णय लिया कि मोर्चा के द्वारा आंदोलन कार्यक्रम यथावत जारी रहेगा क्योंकि कल की वार्ता के आधार पर कोई समाधान नहीं निकला है।मोर्चा की मुख्य समस्याओं में विगत 4 वर्ष से तीनों ऊर्जा निगमों में नियमित तथा संविदा उपनल कर्मचारियों की सभी समस्याओं पर उदासीनता रखा जाना है।

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