उत्तराखंड

अधिकारी कर्मचारी संयुक्त समन्वय समिति,पेयजल निगम ने सचिव पेयजल रणवीर चौहान से मुलाकात की

सेवा में,

प्रबन्ध निदेशक,

उत्तराखण्ड पेयजल निगम,

देहरादून।

विषय : सेन्टेज व्यवस्था समाप्त करते हुये उत्तराखण्ड पेयजल निगम के कार्मिकों/ पेंशनरों के अधिष्ठान व्यय का एकमुश्त प्राविधान करते हुये सचिव (पेयजल) के निवर्तन पर धनराशि रखे जाने के सम्बन्ध में।

महोदय,

उपरोक्त विषयक अधिकारी कर्मचारी संयुक्त समन्वय समिति, उत्तराखण्ड पेयजल निगम के आन्दोलन नोटिस सं० 03/अ०क०सं०स० समिति/ दिनांक 08.01.2026 द्वारा दिनांक 16.01.2026 को पेयजल निगम मुख्यालय पर धरना कार्यक्रम करने का नोटिस निर्गत किया गया था। उक्त के क्रम में आपके द्वारा धरना स्थगित करने के अनुरोध तथा मांगो पर सकारात्मक कार्यवाही किये जाने के आश्वासन के दृष्टिगत समन्वय समिति द्वारा मांगो पर सकारात्मक कार्यवाही हेतु 15 दिन का समय देते हुये धरना स्थगित कर दिया गया था। वार्ता के दौरान आपके द्वारा सेन्टेज व्यवस्था समाप्त करते हुये उत्तराखण्ड पेयजल निगम के कार्मिकों/पेंशनरों के अधिष्ठान व्यय का एकमुश्त प्राविधान करते हुये सचिव (पेयजल) के निवर्तन पर धनराशि रखे जाने हेतु समन्वय समिति के माध्यम से प्रस्ताव दिये जाने हेतु निर्देशित किया गया था। उक्त के क्रम में अनुरोध निम्नानुसार है :-

1. वर्ष 1975 के पूर्व पेयजल एवं सीवर व्यवस्था सम्बन्धी योजनाओं के निर्माण तथा रखरखाव एवं संचालन हेतु “स्वायत्त शासन अभियंत्रण विभाग” (Local Self Government Engineering Department-LSGED) गठित था जो कि अन्य विभागों की भाँति ही एक राजकीय विभाग था। पेयजल एवं सीवर सैक्टर में विश्व बैंक से बाह्य सहायता/ऋण लिए जाने की आवश्यकता तथा इस सम्बन्ध में विश्व बैंक द्वारा तत्समय राजकीय विभाग को ऋण देने के बजाए एक निगम को ऋण देने की स्थिति इंगित किए जाने पर वर्ष 1975 में ‘उत्तर प्रदेश जल संभरण एवं सीवर व्यवस्था अधिनियम, 1975’ प्रख्यापित करते हुए अधिनियम की धारा-3 के अन्तर्गत पेयजल एवं सीवर सम्बन्धी योजनाओं के क्रियान्वयन हेतु पेयजल निगम का गठन किया गया। इस अधिनियम के अध्याय 12 के अन्तर्गत धारा 96 में नियम बनाने की शक्ति, धारा 97 में विनियम बनाने की शक्ति तथा धारा 98 में उपविधियां बनाने की शक्तियां दी गयी हैं जिनके आधार पर कार्मिकों की भर्ती तथा उसके सेवा सम्बन्धी शर्तें, लेखा से सम्बन्धित व्यवस्थाएं, जल एवं सीवर व्यवस्था आदि पर लगने वाले करों/लिए जाने वाले मूल्य / शुल्क की व्यवस्था तथा कार्य की प्रक्रिया आदि की व्यवस्था हेतु समय-समय पर नियम, विनियम एवं उपविधियां अधिसूचित की गयी हैं।

2. ‘उत्तराखण्ड पेयजल संसाधन विकास एवं निर्माण निगम’ के संरचनात्मक ढाँचे का अनुमोदन राज्य सरकार के द्वारा किया जाता है, किन्तु पेयजल निगम के अधिष्ठान व्यय सहित समस्त व्ययों को निगम के द्वारा सम्पादित किए जाने वाले कार्यों के लिए अनुमन्य सेंटेज, जिसकी दरों का निर्धारण भी शासन द्वारा ही किया जाता है, से होने वाली आय से ही वहन किया जाना अपेक्षित है, किन्तु विगत् अनेक वर्षों से यह स्थिति बनी हुई है कि निगम को अधिष्ठान व्यय एवं अन्य व्ययों की पूर्ण व्यवस्था सेंटेज से नहीं हो पा रही है और सरकार को ही गैप फंडिंग एवं सेवानिवृत्तिक लाभ अनुदान आदि मदों में निगम को आर्थिक सहायता/अनुदान देना पड़ रहा है। राजकीय सहायता के बावजूद उत्तराखण्ड शासन के पेयजल एवं वित्त विभाग के मध्य पत्रावलियों के परिचालन में अत्यधिक समय लगने के कारण धन की उपलब्धता की कमी निरन्तर बनी रहती है जिस कारण पेयजल निगम बार-बार पेंशन व वेतन समय से निर्गत न होने के कारण कर्मचारी संघों के द्वारा समय-समय पर कार्य बहिष्कार / हड़ताल जैसे कार्यक्रम आयोजित किये जाते हैं जिससे पेयजल सम्बन्धी कार्य प्रभावित होते हैं।

3. उत्तराखण्ड के पड़ोसी राज्य हिमाँचल प्रदेश, जम्मू कश्मीर, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान आदि सहित देश के अन्य पर्वतीय राज्यों में जलापूर्ति एवं सीवरेज व्यवस्था के संचालन हेतु राजकीय विभाग गठित है। उत्तराखण्ड राज्य के अन्तर्गत ही सड़क, सिंचाई, कृषि जैसे विषयों के लिए लोक निर्माण विभाग, ग्रामीण निर्माण विभाग, सिंचाई विभाग, लघु सिंचाई विभाग तथा कृषि विभाग जैसे राजकीय विभाग गठित हैं, जिनके कार्मिकों को समय से वेतन भत्ते मिलते हैं परन्तु पेयजल जैसी महत्वपूर्ण सेवा / आवश्यकता हेतु राजकीय निगम व्यवस्था होने से वेतन भत्ते की अनिश्चितता बनी रहती है। यहाँ यह भी विचारणीय है कि लोक निर्माण विभाग, सिंचाई आदि अन्य विभागों का अधिष्ठान व्यय लगभग 22 से 43 प्रतिशत आता है, किन्तु पेयजल निगम जैसी संस्था से अधिष्ठान व्यय की व्यवस्था सेंटेज के रूप में अनुमन्य अधिकतम 12.5 प्रतिशत की सीमा में ही कर लेने की अपेक्षा करना तार्किक नहीं प्रतीत होता है।

4. पेयजल निगम में समय पर वेतन इत्यादि न मिल पाने के कारण दक्ष अभियन्ताओं के पलायन की स्थिति बनी रहती है, जिससे पेयजल एवं जलोत्सारण योजनाओं के क्रियान्वयन हेतु कुशल अभियन्ताओं की कमी होना स्वाभाविक है, जिसका प्रतिकूल प्रभाव योजना की गुणवत्ता एवं प्रगति पर पड़ता है।

5. वर्तमान में पेयजल निगम में समय से वेतन / सेवानिवृत्तिक लाभ न मिल पाने के कारण अकसर हड़ताल जैसी परिस्थिति उत्पन्न हो रही है। फलस्वरूप पेयजल व्यवस्था के सुचारू संचालन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। इससे आम जनता को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

6. वर्तमान में पेयजल निगम के अधिष्ठान व्यय एवं वास्तविक अर्जित सेन्टेज के अन्तर की प्रतिपूर्ति भी राज्य सरकार द्वारा की जाती है. परन्तु सेन्टेज / गैप मद की धनराशि से सम्बन्धित पत्रावली धनावंटन हेतु बार-बार उत्तराखण्ड शासन के वित्त विभाग को प्रेषित करनी पड़ती है। उक्त पत्रावलियों के परिचालन में समय लगने के कारण समय से वेतन/पेंशन का भुगतान नहीं हो पाता है।

7. इस सम्बन्ध में अधिकारी कर्मचारी संयुक्त समन्वय समिति, उत्तराखण्ड पेयजल निगम द्वारा माह दिसम्बर, 2021 जनवरी, 2022 में किये गये आन्दोलन के क्रम में माननीय मुख्यमंत्री जी द्वारा दिये गये निर्देशों के क्रम में सचिव, वित्त विभाग, उत्तराखण्ड शासन की अध्यक्षता में दिनांक 03.01.2022 को सम्पन्न बैठक में निम्न बिन्दुओं पर सहमति बनी:-

(अ). उत्तराखण्ड पेयजल निगम व जल संस्थान के कार्मिकों को देय वेतन एवं पेंशन कोषागार के माध्यम से प्रदान किये जाने सम्बन्धी प्रकरण प्रशासकीय विभाग द्वारा मा० मंत्रिमण्डल की आगामी बैठक में उनके निर्णयार्थ प्रस्तुत किया जायेगा।

(ब). उत्तराखण्ड पेयजल निगम को वेतन, पेंशन के भुगतान में विलम्ब होने के दृष्टिगत सचिव, पेयजल विभाग के निर्वतन पर धनराशि की उपलब्धता सुनिश्चित किये जाने के सम्बन्ध में व्यवस्था बनाई जायेगी।

उक्त के क्रम में उत्तराखण्ड पेयजल निगम व जल संस्थान के कार्मिकों को देय वेतन एवं पेंशन कोषागार के माध्यम से प्रदान किये जाने सम्बन्धी प्रकरण वर्तमान में विचाराधीन है तथा उत्तराखण्ड पेयजल निगम को वेतन, पेंशन के भुगतान में विलम्ब होने के दृष्टिगत सचिव, पेयजल विभाग के निर्वतन पर धनराशि की उपलब्धता सुनिश्चित किये जाने की मांग पर मा० मंत्रिमण्डल की बैठक दिनांक 05.01.2022 में निम्न निर्णय लिया गया :-

पेयजल निगम एवं जल संस्थान के कार्मिकों के वेतन, पेंशन के भुगतान में होने वाले विलम्ब को दूर करने के दृष्टिगत सचिव, पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के निवर्तन पर रखे जाने एवं उपलब्ध धनराशि को प्रशासकीय विभाग के से अवमुक्त किये जाने हेतु सचिव, पेयजल विभाग को अधिकृत किये जाने के सम्बन्ध में व्यवस्था बनायी जाय।

8. मा० मंत्रिमण्डल द्वारा दिये गये निर्देशों का अनुपालन वर्तमान तक अपेक्षित है। अतः मा० मंत्रिमण्डल द्वारा दिये गये निर्देशों के क्रम में पेयजल निगम कार्मिकों को समय से वेतन/पेंशन जारी किये जाने हेतु व्यवस्था बनाई जानी अत्यन्त आवश्यक है। वर्तमान में उत्तराखण्ड पेयजल निगम को देय सेन्टेज व देय गैप की धनराशि हेतु राज्य बजट में अलग-अलग मद रखे गये हैं। उक्त मदों के सापेक्ष बजट प्राविधान रू0 20 करोड़ से अधिक होने के कारण बार-बार पत्रावली उत्तराखण्ड शासन के वित्त विभाग को प्रेषित करनी पड़ती है। उक्त के परिचालन में समय लगने के कारण समय से वेतन/पेंशन का भुगतान नहीं हो पाता है। अतः यह उचित होगा कि सेन्टेज को शून्य करते हुये समस्त वास्तविक अधिष्ठान व्यय का एकमुश्त प्राविधान राज्य बजट में कर लिया जाये तथा उक्त बजट की धनराशि पेयजल (सचिव) के निवर्तन पर रखी जाये तथा उक्त राशि के आहरण हेतु बार-बार पत्रावली वित्त विभाग को प्रेषित करने की बाध्यता समाप्त हो। यदि वित्त विभाग आवश्यक समझे तो वित्त विभाग द्वारा प्रत्येक वित्तीय वर्ष में एक अथवा दो बार उक्त समस्त व्यय का परीक्षण करने की व्यवस्था अपने स्तर से बनाई जा सकती है। उक्त व्यवस्था होने से उत्तराखण्ड पेयजल निगम कार्मिकों को वेतन/पेंशन वितरण में विलम्ब नहीं होगा तथा समयानुसार द्रुत गति से कार्य होने से प्रशासकीय कार्यों की दक्षता भी बढ़ेगी।

अतः आपसे अनुरोध है कि कृपया उक्तानुसार प्रस्ताव उत्तराखण्ड शासन को प्रेषित करते हुये शीघ्र शासनादेश जारी कराने की कृपा करेंगे।

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