उत्तराखंड

जल संस्थान से पेयजल योजनायें छीनकर, पेयजल निगम को हस्तान्तरित किए जाने को लेकर जल संस्थान कर्मचारी संघ नाराज

जल संस्थान से पेयजल योजनायें छीनकर, पेयजल निगम को हस्तान्तरित किए जाने को लेकर जल संस्थान कर्मचारी संघ नाराज

देहरादून।उत्तराखण्ड जल संस्थान कर्मचारी संघ, उत्तराखण्ड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री, श्री नन्दलाल जोशी द्वारा अनावश्यक रूप से जल संस्थान से पेयजलयोजनायें छीनकर, पेयजल निगम को हस्तान्तरित कर जल संस्थान को कमजोर किये जाने के बावत् आपत्ति दर्ज करते हुये माननीय मुख्यमंत्री जी को पत्र लिखा। पत्र में शासन पर पक्षपात का आरोप लगाते हुये माननीय मुख्यमंत्री को लिखा कि जल संस्थान को कमजोर करने की दृष्टिग से जल संस्थान की पेयजल योजनायें जल निगम को सौंपी जा रही हैं।

सरकार को भी उत्तराखण्ड जल संस्थान विभाग के कारण कभी भी असहज स्थिति का सामना नहीं करना पड़ा है। विषम से भी विषम परिस्थितियों में विभाग द्वारा अपनी उत्कृष्ट सेवा का प्रदर्शन करते हुये जलापूर्ति व्यवस्था को सुचारू बनाये रखा गया। जल संस्थान के समस्त अभियन्तागणों एवं कर्मचारीगणों द्वारा सदैव एक परिवार की भांति संगठित रह कर अपने दायित्वों का निर्वाहन किया जाता रहा है, जिसका परिणाम रहा है कि जल संस्थान को अपने अधिष्ठान सम्बन्धी वित्तीय दायित्वों की पूर्ति हेतु शासन पर निर्भर न रहते हुये, स्वयं के संसाधनों से पूर्ति की जाती है।

विगत कुछ वर्षों से उच्च स्तर से एक अजीब सी स्थिति पैदा की जा रही है। पहले पैरी अर्बन के नाम पर, फिर जल जीवन मिशन के नाम पर पेयजल योजनाओं का निर्माण कार्य पेयजल निगम को देने के साथ ही उनका अनुरक्षण एवं रखरखाव भी पेयजल निगम को दे दिया गया है। उक्त के अतिरिक्त जल संस्थान की सबसे अच्छी एवं राजस्व की दृष्टि से महत्वपूर्ण योजनाओं को भी अकारण पेयजल निगम को हस्तान्तरित करा दिया गया है तथा यह स्थिति अभी भी जारी रखी जा रही है, जिसे सहस्त्रधारा पेयजल योजना के रूप में देखा जा सकता है। एक विभाग जो अपने पैरो पर खड़ा है तथा निष्ठा पूर्वक नागरिको को निर्बाद्ध रूप से पेयजल आपूर्ति उपलब्ध करा रहा है. उसे अनावश्यक रूप से Disturb करते हुये, कमजोर करने का प्रयास किया जा रहा है, जिसके फलस्वरूप जल संस्थान के सभी कार्मिक उच्च स्तर से किये जा रहे पक्षपात पूर्ण रवैये से व्यथित एवं अक्रोशित है।

जल संस्थान द्वारा पूर्व में संचालित की जा रही पेयजल योजनायें जल संस्थान को वापिस करवाने एवं जिन पेयजल योजनाओं पर जल संस्थान कार्य कर रहा था, उन्हें यथावत् जल संस्थान में रखे जाने हेतु माननीय मुख्यमंत्री जी द्वारा शासन को अपने स्तर से प्रभावी निर्देश जारी करने हेतु अनुरोध किया गया।

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