डॉ. निशंक के जन्मदिवस की पूर्व संध्या पर वैश्विक शुभकामनाओं की गूंज
डॉ. निशंक के जन्मदिवस की पूर्व संध्या पर वैश्विक शुभकामनाओं की गूंज
(65 से अधिक देशों की सहभागिता के साथ ऑनलाइन अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित)
देहरादून। उत्तराखण्ड के पूर्व मुख्यमंत्री, भारत सरकार के पूर्व शिक्षा मंत्री एवं लेखक गाँव के संस्थापक डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ के जन्मदिवस की पूर्व संध्या पर लेखक गाँव के तत्वावधान में एक भव्य ऑनलाइन अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस अवसर पर भारत सहित विश्व के 65 से अधिक देशों से जुड़े साहित्यकारों, शिक्षाविदों, हिंदी प्रेमियों, शोधकर्ताओं एवं प्रवासी भारतीयों ने ऑनलाइन माध्यम से सहभागिता करते हुए डॉ. निशंक को जन्मदिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ प्रेषित कीं तथा उनके स्वस्थ, सुदीर्घ एवं यशस्वी जीवन की मंगलकामना की।
“डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ : व्यक्तित्व एवं कृतित्व” विषय पर आयोजित इस संगोष्ठी में देश-विदेश के वक्ताओं ने डॉ. निशंक के साहित्यिक अवदान, शैक्षिक दृष्टि, सांस्कृतिक प्रतिबद्धता, सामाजिक सरोकारों तथा हिंदी भाषा को वैश्विक स्तर पर प्रतिष्ठित करने में उनके योगदान पर विस्तार से अपने विचार व्यक्त किए। वक्ताओं ने कहा कि डॉ. निशंक ने साहित्य, शिक्षा, संस्कृति और सार्वजनिक जीवन में समान रूप से उल्लेखनीय कार्य करते हुए भारतीय जीवन-मूल्यों तथा हिंदी भाषा को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
संगोष्ठी में डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ स्वयं भी ऑनलाइन माध्यम से जुड़े। उन्होंने देश-विदेश से जुड़े साहित्यकारों, विद्वानों एवं हिंदी प्रेमियों द्वारा व्यक्त शुभकामनाओं के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह स्नेह और विश्वास उनके लिए निरंतर समाज, साहित्य और राष्ट्र के प्रति समर्पित भाव से कार्य करने की प्रेरणा है। उन्होंने कहा कि लेखक गाँव भारतीय साहित्य, संस्कृति और ज्ञान परंपरा को समर्पित एक ऐसा वैश्विक मंच बन रहा है, जहाँ भारत ही नहीं, बल्कि विश्वभर के साहित्यकार, चिंतक और शोधकर्ता एक साझा सांस्कृतिक परिवार के रूप में जुड़ रहे हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि हिंदी भाषा और भारतीय संस्कृति का वैश्विक विस्तार आने वाले समय में और अधिक सशक्त होगा।
भारत के विभिन्न राज्यों से जुड़े प्रख्यात साहित्यकारों एवं विद्वानों में डॉ. नरेश शांडिल्य, डॉ. अलका सिन्हा, डॉ. बेचैन कण्डियाल, डॉ. जयशंकर, डॉ. वेद प्रकाश, डॉ. नीरज भारद्वाज, डॉ. रवि गौंड, डॉ. नमिता जैन, डॉ. वीर बहादुर, डॉ. अजय शेखावत एवं डॉ. उषी बाला सहित अनेक विद्वानों ने अपने विचार व्यक्त करते हुए डॉ. निशंक के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डाला तथा उन्हें जन्मदिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ दीं।
संगोष्ठी की विशेष पहचान इसकी व्यापक अंतरराष्ट्रीय सहभागिता रही। कतर से डॉ. विनीता, जर्मनी से डॉ. राम भट्ट, श्रीलंका से डॉ. अथिला कोठिलवाला तथा कनाडा से योजना साहू सहित विश्व के 65 से अधिक देशों से जुड़े साहित्यकारों, शिक्षाविदों, हिंदी सेवियों एवं प्रवासी भारतीयों ने अपने शुभकामना संदेश प्रेषित किए। वक्ताओं ने कहा कि डॉ. निशंक का साहित्य भारतीय संस्कृति, मानवीय मूल्यों और राष्ट्रचेतना का सशक्त प्रतिनिधित्व करता है तथा हिंदी भाषा के वैश्विक प्रसार में उनका योगदान प्रेरणादायी है।
संगोष्ठी का संयोजन डॉ. शिप्रा शिल्पी सक्सेना (संस्थापक, सृजनी एवं VHSS Europe, अंतरराष्ट्रीय प्रवासी संयोजक, लेखक गाँव, जर्मनी), डॉ. बेचैन कण्डियाल (जनसंपर्क अधिकारी, लेखक गाँव) एवं आशना कण्डियाल नेगी (अध्यक्ष, हिमालय विरासत ट्रस्ट) ने संयुक्त रूप से किया। कार्यक्रम का प्रभावी संचालन डॉ. किरण खन्ना (पंजाब), डॉ. विवेकमणि त्रिपाठी (चीन) तथा डॉ. रवि गौंड (दिल्ली) ने संयुक्त रूप से किया।
संगोष्ठी के समापन पर सभी प्रतिभागियों ने डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ के उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु एवं निरंतर सक्रिय सार्वजनिक जीवन की कामना करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि उनका साहित्य, शिक्षा, संस्कृति और राष्ट्रसेवा का बहुआयामी योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणास्रोत बना रहेगा।

