स्मार्ट मीटर से अधिक बिल की शिकायतें खारिज, यूपीसीएल के पक्ष में विद्युत लोकपाल का फैसला

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स्मार्ट मीटर से अधिक बिल की शिकायतें खारिज, यूपीसीएल के पक्ष में विद्युत लोकपाल का फैसला

देहरादून। स्मार्ट मीटर से अधिक बिजली बिल आने की शिकायतों को लेकर विद्युत लोकपाल ने उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल) के पक्ष में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। दो अलग-अलग मामलों की सुनवाई के दौरान लोकपाल ने स्मार्ट मीटर की कार्यप्रणाली, मीटर रीडिंग, पावर फैक्टर, भुगतान रिकॉर्ड और लागू टैरिफ प्रावधानों की विस्तृत जांच की। जांच में बिलिंग से संबंधित यूपीसीएल की प्रक्रिया को सही पाया गया।

दोनों मामलों में उपभोक्ताओं ने स्मार्ट मीटर के आधार पर जारी बिजली बिल को अधिक बताते हुए आपत्ति दर्ज कराई थी। मामलों की सुनवाई पहले कुमाऊं जोन उपभोक्ता शिकायत निवारण फोरम के समक्ष हुई थी। फोरम के निर्णय के बाद उपभोक्ताओं की ओर से विद्युत लोकपाल के समक्ष अपील की गई।

विद्युत लोकपाल ने मामलों से जुड़े अभिलेखों, मीटर रीडिंग और बिलिंग रिकॉर्ड का परीक्षण किया। इसके साथ ही पावर फैक्टर, उपभोक्ताओं द्वारा किए गए भुगतान तथा संबंधित टैरिफ प्रावधानों को भी जांच के दायरे में लिया गया। स्मार्ट मीटर की कार्यप्रणाली और उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर लोकपाल को बिलिंग में ऐसी कोई अनियमितता नहीं मिली, जिससे यूपीसीएल की ओर से जारी बिल को गलत ठहराया जा सके।

सुनवाई के बाद विद्युत लोकपाल ने दोनों उपभोक्ताओं की अपील खारिज कर दी। साथ ही कुमाऊं जोन उपभोक्ता शिकायत निवारण फोरम द्वारा दिए गए पूर्व निर्णय को भी बरकरार रखा। इस फैसले से दोनों मामलों में यूपीसीएल की ओर से की गई बिलिंग को वैध माना गया है।

फैसले के बाद यूपीसीएल के अधिकारियों का कहना है कि स्मार्ट मीटर से संबंधित शिकायतों के निस्तारण में मीटर की रीडिंग, उपभोग पैटर्न, पावर फैक्टर, भुगतान विवरण और संबंधित टैरिफ प्रावधानों का परीक्षण किया जाता है। विद्युत लोकपाल के निर्णय से यह भी स्पष्ट हुआ कि केवल बिल अधिक आने की शिकायत के आधार पर बिलिंग को गलत नहीं माना जा सकता, बल्कि उपलब्ध तकनीकी एवं अभिलेखीय तथ्यों के आधार पर मामले का परीक्षण किया जाता है।

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