ग्लेशियर झीलों के संभावित खतरे का होगा वैज्ञानिक आकलन
Oplus_16908288
ग्लेशियर झीलों के संभावित खतरे का होगा वैज्ञानिक आकलन
सरस्वती ताल और केदारताल के लिए विशेषज्ञ दल रवाना
देहरादून। प्रदेश में ग्लेशियर झीलों से उत्पन्न संभावित जोखिमों को कम करने और आपदा प्रबंधन की तैयारियों को मजबूत करने के उद्देश्य से चमोली की सरस्वती ताल और उत्तरकाशी की केदारताल के सर्वेक्षण के लिए विशेषज्ञ दल रवाना हो गया है। सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने USDMA से दल को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रदेश की संवेदनशील ग्लेशियर झीलों का व्यापक वैज्ञानिक अध्ययन कराया जा रहा है। सर्वेक्षण में झीलों के जलस्तर, आकार में बदलाव, आसपास के भू-भाग और संभावित जोखिम वाले क्षेत्रों का आकलन किया जाएगा। संभावित खतरे की स्थिति में समय रहते चेतावनी पहुंचाने के लिए आधुनिक सेंसर, जलस्तर मापक उपकरण और संचार प्रणालियों की उपलब्धता भी सुनिश्चित की जाएगी।
आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास मंत्री मदन कौशिक ने कहा कि ग्लेशियर झीलों से संभावित आपदा के प्रभाव को कम करने के लिए आवश्यक सुरक्षात्मक और जोखिम न्यूनीकरण उपायों पर काम किया जा रहा है।
सचिव विनोद कुमार सुमन ने बताया कि उत्तराखंड में 13 ग्लेशियर झीलों को संवेदनशील श्रेणी में चिन्हित किया गया है। इनमें से चार का सर्वेक्षण पूरा हो चुका है, जबकि शेष झीलों का चरणबद्ध तरीके से वैज्ञानिक अध्ययन कराया जा रहा है। सरस्वती ताल करीब 5,700 मीटर और केदारताल करीब 4,750 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। सर्वेक्षण में डाउनस्ट्रीम क्षेत्रों पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों का भी अध्ययन किया जाएगा।
अभियान में USDMA, ULMMC, बाबा साहनी पुराविज्ञान संस्थान लखनऊ, वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान, NIH रुड़की, SDRF, NDRF और नेहरू पर्वतारोहण संस्थान के विशेषज्ञ शामिल हैं। इस अवसर पर डीआईजी राजकुमार नेगी, जेसीईओ दिनेश कुमार पुनेठा सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
