लंबे समय से एक जिले में तैनात अफसरों की होगी समीक्षा
काफी समय से एक जिले में तैनात अफसरों की होगी समीक्षा
उत्तराखंड में चुनाव से पहले बड़े प्रशासनिक फेरबदल की तैयारी!
विधानसभा चुनाव 2027 से पहले निर्वाचन आयोग ने कसी कमर, गृह जिले में तैनात चुनाव से जुड़े अधिकारियों को हटाने के निर्देश; उत्तराखंड समेत पांच राज्यों को भेजी गई गाइडलाइन
देहरादून। उत्तराखंड में वर्ष 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले प्रशासनिक महकमे में तबादलों को लेकर हलचल तेज होने के संकेत मिल रहे हैं। भारत निर्वाचन आयोग ने चुनावी प्रक्रिया को निष्पक्ष, पारदर्शी और स्वतंत्र बनाए रखने के लिए अधिकारियों की तैनाती एवं स्थानांतरण को लेकर दिशा-निर्देश जारी किए हैं। आयोग की ओर से उत्तराखंड समेत पांच राज्यों के मुख्य सचिवों और मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को पत्र भेजकर निर्धारित मानकों के अनुरूप आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया है।
विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच आयोग के इन निर्देशों को प्रशासनिक व्यवस्था की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आयोग का जोर इस बात पर है कि चुनाव प्रक्रिया से सीधे जुड़े अधिकारियों की तैनाती ऐसी हो, जिससे निर्वाचन के दौरान निष्पक्षता बनी रहे और किसी भी अधिकारी की स्थानीय स्तर पर लंबे समय से बनी प्रशासनिक पकड़ चुनावी व्यवस्था को प्रभावित न कर सके।
गृह जिले में तैनाती पर रहेगी नजर
निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार, चुनाव प्रक्रिया से प्रत्यक्ष रूप से जुड़े अधिकारियों को उनके गृह जिले में तैनात नहीं रखा जाएगा। ऐसे अधिकारियों की तैनाती की समीक्षा निर्धारित मानकों के अनुसार की जाएगी। चुनाव के दौरान जिला प्रशासन, पुलिस और निर्वाचन संबंधी जिम्मेदारियां निभाने वाले अधिकारियों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में उनकी तैनाती को लेकर आयोग के नियमों का अनुपालन सुनिश्चित करना आवश्यक होगा।
आयोग की ओर से जारी गाइडलाइन में लंबे समय से एक ही जिले में सेवाएं दे रहे अधिकारियों की तैनाती की समीक्षा पर भी जोर दिया गया है। निर्धारित मानकों के दायरे में आने वाले अधिकारियों के संबंध में नियमानुसार स्थानांतरण की कार्रवाई की जा सकती है। हालांकि, यह प्रक्रिया संबंधित अधिकारी की जिम्मेदारी, तैनाती की अवधि और आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुरूप तय होगी।
उत्तराखंड में भी प्रभावित हो सकती है तबादला प्रक्रिया
उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव को देखते हुए आयोग की गाइडलाइन के अनुपालन के लिए शासन और प्रशासन को अधिकारियों की तैनाती की स्थिति का आकलन करना होगा। खासतौर पर उन अधिकारियों की तैनाती पर ध्यान दिया जा सकता है, जो लंबे समय से एक ही जिले में कार्यरत हैं और चुनाव संबंधी जिम्मेदारियों से जुड़े हैं।
निर्धारित मानकों के तहत आने वाले अधिकारियों के स्थानांतरण की जरूरत सामने आने पर संबंधित विभागों को आवश्यक कार्रवाई करनी पड़ सकती है। इससे चुनाव से जुड़े विभिन्न विभागों में तैनाती की समीक्षा और प्रशासनिक स्तर पर फेरबदल की प्रक्रिया तेज होने की संभावना है। हालांकि, अभी किसी विशेष अधिकारी के तबादले या तबादलों की संख्या को लेकर कोई विवरण सामने नहीं है।
पांच राज्यों को भेजे गए निर्देश
भारत निर्वाचन आयोग ने उत्तराखंड के अलावा गोवा, मणिपुर, पंजाब और उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिवों तथा मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को भी पत्र भेजा है। इन राज्यों में आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों के मद्देनजर अधिकारियों की तैनाती से जुड़े नियमों के अनुपालन पर जोर दिया गया है।
आयोग का उद्देश्य चुनाव से पहले प्रशासनिक व्यवस्था को निर्धारित मानकों के अनुरूप रखना और निर्वाचन प्रक्रिया में निष्पक्षता सुनिश्चित करना है। वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले जारी इन निर्देशों के बाद उत्तराखंड के प्रशासनिक महकमे में भी अधिकारियों की तैनाती की समीक्षा महत्वपूर्ण हो गई है। अब आगे की कार्रवाई शासन स्तर पर होने वाली समीक्षा और आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुपालन पर निर्भर करेगी।

