उत्तराखंड

जल निगम-जल संस्थान संयुक्त मोर्चा की आज महत्वपूर्ण बैठक हुई, की ये मांग

जल निगम-जल संस्थान संयुक्त मोर्चा की उच्चाधिकार समिति की बैठक देहरादून में आयोजित की गई। उक्त बैठक में उत्तराखण्ड पेयजल निगम एवं उत्तराखण्ड जल संस्थान का एकीकरण करते हुये राजकीयकरण करने की मांग की गई तथा केबिनेट में उक्त विषय को शीघ्र माननीय केबिनेट में लाने की मांग की गई। साथ ही बैठक में UUSDA द्वारा कराये जा रहे समस्त पेयजल / सीवरेज निर्माण कार्य को उत्तराखण्ड पेयजल निगम एवं उत्तराखण्ड जल संस्थान को हस्तान्तरित करने की मांग की गई। साथ ही यह भी मांग की गई कि शहरी विकास विभाग द्वारा पूर्व में कराये गये ए०डी०बी० के कार्यों की एस०आई०टी० जांच की जाये। बैठक में उपस्थित पदाधिकारियों ने कहा कि एस०आई०टी० जांच से कम कुछ भी मंजूर नहीं है।

बैठक में वक्ताओं द्वारा कहा गया कि लगातार पेयजल निगम व जल संस्थान के कार्य क्षेत्र में अतिक्रमण किया जा रहा है। शहरी विकास विभाग द्वारा पेयजल / सीवरेज कार्य UUSDA के माध्यम से संचालित कराए जा रहे हैं। उक्त संस्था द्वारा कराए जा रहे कार्यों के निरीक्षण / पर्यवेक्षण हेतु सक्षम व आवश्यक तकनीकी अनुभव युक्त अभियन्ता तैनात नहीं हैं, अपितु अन्य विभाग से प्रतिनियुक्ति पर लाए गए अभियन्ता उक्त संस्था में कार्य कर रहे हैं। उक्त संस्था के अन्तर्गत कार्यरत अधिकांश अभियन्ता उनके द्वारा धारित पद के अनुरूप आवश्यक न्यूनतम तकनीकी अर्हता एवं सीवरेज / पेयजल का अनुभव नहीं रखते हैं। परिणामतः उक्त संस्था द्वारा कराए जा रहे कायों की गुणवत्ता स्तरीय नहीं पायी गयी है, जिस कारण निर्माण कार्यों में लापरवाही व तकनीकी अज्ञानता के कारण जहां शासकीय धन की बर्बादी हो रही है वहीं अनियोजित एवं त्रुटिपूर्ण हानि निर्माण कार्यों के कारण आम जनता को हो रही असुविधा के कारण सरकार की छवि भी घूमिल हो रही है।

जल संस्थान-जल निगम संयुक्त मोर्चे के संयोजक विजय खाली ने बताया कि ए०डी०बी० द्वारा पूर्व में कराये गये कार्यों की उच्च स्तरीय जांच आवश्यक है। शहरी विकास विभाग के अधिकारियों द्वारा लगातार ए०डी०बी० विंग द्वारा किये जा रहे काले कारनामों पर पर्दा डाला जा रहा है। जनपद नैनीताल में हल्द्वानी में ए०डी०बी० द्वारा वर्ष 2013 में 17 टैंक बनवाये गये थे जिनमें से 08 टैंक तो बनने के बाद से ही लगातार लीक है। लीक टैंको की लागत की भरपाई एजेन्सी से न कराना अपने आप में शहरी विकास विभाग के अधिकारियों के आचरण को प्रदर्शित करता है। इन 08 लीक टैंको से अब तक अरबो लीटर पानी का अपव्यय हो चुका है। उक्त पानी के उत्पादन में लगी बिजली की लागत ही लाखो रूपये है। धन्य है, शहरी विकास विभाग, जिसके इंजीनियर्स को काली सूची में डाल कर बर्खास्त किया जाना चाहिये थे, उन्हें पूरी UUSDA का ही सर्वे सर्वा बना दिया गया।

मार्च के संयोजक श्री रमेश विंजोला देहरादून में नलकूप निर्माण हेतु सन् 1975 से ही जल संस्थान एवं जल निगम विशेषज्ञ विभाग है, जिन्हे पूरे क्षेत्र के भूगर्भीय स्थिति का अनुभव है वहीं ए०डी०बी० के प्रतिनियुक्ति पर बिजली विभाग के अभियन्ताओं ने भूगर्भीय स्थिति के विपरीत अज्ञानता व इतर कारणों से क्षेत्र के स्ट्राटा के विपरीत अधिक गहराई के नलकूप बनाये गये जबकि नलकूप क्षेत्र के विशेषज्ञ विभाग जल निगम / जल संस्थान व सिंचाई विभाग के अभियन्ता भली-भांति विज्ञ हैं कि देहरादून में नीचली सतह (200 मीटर से नीचे) शिवालिक चट्टाने हैं जिससे भू-जल की उपलब्धता नहीं है। ए०डी०बी० द्वारा बनाये गये नलकूप में अधिक गहराई तक आवश्यक ड्रिलिंग कर ठेकेदार को लाभ पहुंचाया गया है। एक नलकूप (बीमा कॉलोनी) तो ऐसे स्थान पर बना दिया गया जहां नलकूप की साध्यता को उत्तराखण्ड पेयजल निगम / उत्तराखण्ड जल संस्थान पूर्व में नकार चुके है। वहां पर नलकूप निर्माण कर 1.25 करोड़ रूपये खर्च कर दिये गये जबकि वहां बमुश्किल 150 एल०पी०एम० भी श्राव नहीं मिल पा रहा है।

उक्त के अतिरिक्त जल निगम-जल संस्थान संयुक्त मार्च के संयोजक (गढ़वाल) श्री श्याम सिंह नेगी ने बताया कि UUSDA के अधिकारियों ने मूल मंत्र दिया है कि “यावत्-जीवते सुखम् जीवते ऋणम् कृत्वा घृतम् पिवते” इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है कि ए०डी०बी० के प्रथम चरण में स्वीकृत धनराशि को जब पेयजल / सीवरेज कार्यों में नहीं खपाया जा सका तो उक्त बजट को सडक किनारे सौंदयीकरण में खर्च कर दिया गया। इसके तहत जहां राजपुर रोड़ पर सड़क किनारे बिना किसी नियोजन के कार्य करा दिये गये, वहीं बोलार्ड द्वारा विद्युतीकरण कार्य मात्र कागजों में कराया गया। राजपुर रोड़ पर जल संरक्षण के नाम पर जो संरचना बनायी गयी है, वह क्षेत्र विशेष के अनुरूप नहीं है। इसकी उच्च स्तरीय जांच आवश्यक है।

बैठक में निम्न कार्मिक उपस्थित रहे :-

श्री रमेश विंजोला, श्री विजय खाली, श्री श्याम सिंह नेगी, श्री राम चन्द्र सेमवाल, श्री गौरव बर्तवाल, श्री अजय सिंह चौहान, श्री मानवर सिंह बिष्ट, श्री बचन सिंह, श्री लाल सिंह रौतेला, श्री शिशुपाल सिंह रावत, श्री विनोद सिंह, श्री अशीष तिवारी, श्री धन सिंह चौहान, श्री संदीप मलोहत्रा।

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