उत्तराखंड में 50 पुरानी 108 एम्बुलेंस तत्काल बदली जाएंगी, मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन के निर्देश
उत्तराखंड में 50 पुरानी 108 एम्बुलेंस तत्काल बदली जाएंगी, मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन के निर्देश
तीन लाख किलोमीटर से अधिक चल चुकी एम्बुलेंस को बदलने की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश, सेवा की निगरानी के लिए बनेगी विशेष टीम
देहरादून। उत्तराखंड में 108 एम्बुलेंस सेवा को अधिक प्रभावी, सुदृढ़ और जनोपयोगी बनाने के लिए शासन ने सख्त कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन की अध्यक्षता में सचिवालय में आयोजित व्यय वित्त समिति की बैठक में तीन लाख किलोमीटर से अधिक चल चुकी लगभग 50 एम्बुलेंस को तत्काल बदलने की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए गए। मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि एम्बुलेंस सेवा सीधे लोगों के जीवन से जुड़ी है, इसलिए इसमें किसी भी स्तर पर लापरवाही और अनावश्यक देरी बर्दाश्त नहीं की जानी चाहिए।
मुख्य सचिव ने कहा कि 108 एम्बुलेंस को निर्धारित मानकों के अनुरूप अपडेट रखा जाए। पुरानी और निर्धारित अवधि पूरी कर चुकी एम्बुलेंस को चरणबद्ध तरीके से बदला जाए, लेकिन इस प्रक्रिया में अनावश्यक विलंब नहीं होना चाहिए। उन्होंने सेवा की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए वाहनों की स्थिति और उपलब्ध सुविधाओं पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए।
निगरानी के लिए गठित होगी डेडिकेटेड टीम
मुख्य सचिव ने 108 एम्बुलेंस सेवा की प्रभावी निगरानी के लिए विभागीय स्तर पर मजबूत मॉनिटरिंग मैकेनिज्म विकसित करने को कहा। इसके तहत अलग-अलग स्तरों पर साप्ताहिक और मासिक आधार पर समीक्षा की जाएगी। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) में एक विशेष टीम गठित की जाएगी, जो एम्बुलेंस सेवा के विभिन्न पहलुओं की नियमित निगरानी और विश्लेषण करेगी।
उन्होंने निर्देश दिए कि सेवा में किसी भी प्रकार की कमी, अनियमितता या असामान्य स्थिति सामने आने पर तत्काल आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि आपातकालीन परिस्थितियों में मरीजों को समय पर सहायता मिल सके।
रिस्पांस टाइम में देरी के कारणों का होगा विश्लेषण
मुख्य सचिव ने एम्बुलेंस के पहुंचने के समय का आकलन केवल औसत रिस्पांस टाइम के आधार पर करने के बजाय प्रत्येक मामले का अलग-अलग विश्लेषण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यह पता लगाया जाना जरूरी है कि किन मामलों में एम्बुलेंस पहुंचने में अधिक समय लगा और इसके पीछे क्या कारण रहे।
इस व्यवस्था से देरी वाले मामलों की पहचान करने, उनकी वजहों का पता लगाने और आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने में मदद मिलेगी।
जीवनरक्षक उपकरणों की हर माह जांच अनिवार्य
मुख्य सचिव ने एम्बुलेंस में उपलब्ध जीवनरक्षक उपकरणों की प्रत्येक माह अनिवार्य जांच सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय करने को कहा, ताकि आपातकालीन स्थिति में मरीजों को एम्बुलेंस के भीतर आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हो सकें।
एम्बुलेंस सेवा के लिए बनेगा मोबाइल ऐप
108 एम्बुलेंस सेवा की निगरानी और संचालन को आसान बनाने के लिए एक मोबाइल ऐप भी शीघ्र तैयार किया जाएगा। मुख्य सचिव ने कहा कि ऐप के माध्यम से मरीज की स्थिति और लोकेशन के आधार पर एम्बुलेंस की आवाजाही तथा सेवा की निगरानी अधिक प्रभावी ढंग से की जा सकेगी।
उन्होंने सरकारी एम्बुलेंसों को भी आवश्यक सुविधाओं से युक्त करते हुए इस व्यवस्था में शामिल करने पर जोर दिया। इससे प्रदेश में उपलब्ध एम्बुलेंस की संख्या और सेवा की क्षमता बढ़ेगी। साथ ही, आपातकालीन परिस्थितियों में लोगों को समय पर सहायता उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
प्रदेश में 272 एम्बुलेंस दे रही हैं 108 सेवा
बैठक में जानकारी दी गई कि वर्तमान में प्रदेश में 108 सेवा के अंतर्गत 272 एम्बुलेंस संचालित हैं। इसके अतिरिक्त स्वास्थ्य विभाग द्वारा 250 से अधिक सरकारी एम्बुलेंस भी संचालित की जा रही हैं। सरकारी एम्बुलेंसों को भी आवश्यक सुविधाओं से लैस कर समन्वित व्यवस्था में शामिल करने से आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत किया जा सकेगा।
बैठक में सचिव विनय शंकर पाण्डेय, अपर सचिव नवनीत पाण्डेय, रोहित मीणा और डीजी हेल्थ डॉ. सुनीता टम्टा सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

