पीएमजीएसवाई और पीडब्लूडी में खाली पड़े हैं चीफ इंजीनियरों के पद
देहरादून। पीएमजीएसवाई योजना का शुभारंभ केंद्र सरकार ने दिसंबर 2000 में शुरू किया था। जिसका उद्येश्य सड़कों का जाल बिछाने के साथ गरीबी कम करने के लिए की गई थी। जिसमें उच्च तकनीकी और प्रबंधन मानकों को स्थापित करने और राज्य-स्तरीय नीति विकास और योजना को सुगम बनाना है। ताकि टिकाऊपन सुनिश्चित हो ग्रामीण सड़क नेटवर्क का प्रबंधन। यह योजना केवल ग्रामीण क्षेत्रों को कवर करती है।
उत्तराखंड के कई जनपदों में प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के अंतगर्त शानदार कार्य हुआ है। हाल ही पीएमजीएसवाई की वर्ष 2021-22 की प्रगति सूची जारी हुई। इस सूची में उत्तराखंड के तीन जिलों ने जगह बनाई है। जिसमें पिथौरागढ़ जनपद तीसरे स्थान पर है। जनपद में एक वर्ष के दौरान 363.383 किमी सड़क का निर्माण हुआ है। जबकि अल्मोड़ा 10वें और चमोली जिले ने 22वें नंबर पर जगह बनाई है। वहीं अल्मोड़ा जिला 321.87 किमी सड़क निर्माण के साथ टाप-10 में रहा है। गढ़वाल मंडल के चमोली जनपद ने 237.348 किमी सड़क का निर्माण कर सूची में 22वां स्थान हासिल किया है।
कब होगी चीफ इंजीनियर की नियुक्ति
आपको यह जानकर हैरानी होगी कि एक तरफ जहां पीएमजीएसवाई शानदार कार्यों की सफलता का जश्न मना रही है। वहीं दूसरी तरफ पीएमजीएसवाई उत्तराखंड में चीफ इंजीनियर का पद खाली पड़ा हुआ है। आपको यह जानकर और भी हैरानी होगी कि यह पद एक दो महीने से नहीं बल्कि पिछले डेढ़ साल से खाली पड़ा हुआ है। जिसके कारण सड़कों का कार्य प्रभावित हो रहा है। लेकिन इसके बावजूद सरकार इस खाली पद पर चीफ इंजीनियर की तैनाती नहीं कर पा रही है। जबकि विभाग में कई काबिल इंजीनियर मौजूद है। जिनमें से यह तैनाती होगी है। विभागीय मंत्री की चुप्पी भी कई सवाल खड़े करती है।
पीडब्लूडी में मुख्य अभियंता गढ़वाल का पद खाली
वहीं पीएमजीएसवाई की तरह ही पीडब्लूडी में मुख्य अभियंता गढ़वाल का पद खाली है। मुख्य अभियंता गढ़वाल के अधीन तीन बड़े जिले रूद्रप्रयाग, चमोली, उत्तरकाशी आते हैं। इन्हीं जनपदों में चारधाम यात्रा व शीतकालीन यात्रा के कारण यात्रियों का भारी दबाव रहता है। ऐसे में मुख्य अभियंता की तैनाती न होना कई सवाल खड़े करता है।

