उत्तराखंड पेयजल निगम से आया ये अपडेट,MD साहब ने कही ये बात

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अधोहस्ताक्षरी के संज्ञान में आया है कि प्रधान कार्यालय स्तर से कतिपय प्रकरणों की पत्रावलियां अधोहस्ताक्षरी के बिना संज्ञान में लाये तथा संस्तुति के सीधे नीतिगत एवं अन्य प्रकरणों में अध्यक्ष / सचिव (पेयजल) को कार्यवाही हेतु प्रेषित की जा रही हैं, जो कदापि उचित नहीं है। पूर्व से यह व्यवस्था है कि पेयजल निगम में प्रबन्ध निदेशक विभागाध्यक्ष होने के कारण कार्मिक / अभियन्ताओं से सम्बन्धित प्रकरण / प्रस्ताव बिना प्रबन्ध निदेशक की संस्तुति के अध्यक्ष / सचिव (पेयजल) को प्रेषित नहीं होंगे, परन्तु उक्त का अनुपालन नहीं किया जाना संज्ञानित हुआ है, जोकि प्रधान कार्यालय में कार्यरत अभियन्ताओं की मनमाने तरीके से कार्यप्रणाली को दर्शाता है। इसके अतिरिक्त यह भी संज्ञान में आया है कि अधिशासी अभियन्ता / अधीक्षण अभियन्ता अपने स्थानान्तरण हेतु सीधे अध्यक्ष / सचिव ( पेयजल ) से पत्राचार कर रहे हैं, जबकि प्रबन्ध निदेशक पेयजल निगम (विभागाध्यक्ष) स्तर पर उक्त अभियन्ताओं का आवेदन उचित माध्यम से प्राप्त होना चाहिए।

इस सम्बन्ध में निर्देश दिये जाते हैं कि प्रधान कार्यालय में किसी भी प्रकार का प्रकरण जिस पर उच्च स्तर से अनुमोदन प्राप्त किया जाना हो, अधोहस्ताक्षरी की संस्तुति के बिना सीधे अध्यक्ष, उत्तराखण्ड पेयजल निगम / सचिव (पेयजल) को प्रेषित न किया जाये यदि भविष्य में इस प्रकार का कोई प्रकरण संज्ञान में आता है तो सम्बन्धित कार्मिकों के विरूद्ध उत्तराखण्ड पेयजल निगम कर्मचारी आचरण नियमावली-2017 में निहित प्राविधानों के तहत कार्यवाही अमल में लायी जायेगी उक्त आदेश तत्काल प्रभाव से लागू होंगे।

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