उत्तराखंड

पेयजल कार्मिकों का पूरे प्रदेश में धरना प्रदर्शन जारी,अब जल्द करेंगे कार्यबाहिष्कार

पूर्व घोषित कार्यक्रम के अनुसार पेयजल कार्मिकों द्वारा पूरे प्रदेश के समस्त जनपदों / नगरों में जल संस्थान-जल निगम समस्त मोर्चा के बैनर तले आज दिनांक 24.01.2024 को भी प्रातः 10:00 बजे से 12:00 बजे तक धरना दिया गया। जनपद देहरादून में जल संस्थान व जल निगम कार्मिकों द्वारा प्रधान कार्यालय, उत्तराखण्ड जल संस्थान, जल भवन, नेहरू कॉलोनी, देहरादून में धरना दिया गया, जिसमें भारी संख्या में पेंशनर्स भी शामिल हुए।

जल निगम कर्मचारी महासंघ के प्रान्तीय मंत्री श्री गौरव बर्थवाल ने शीघ्र मार्च की दो सूत्रीय मांगों को हल करने की मांग की।

जल निगम-जल संस्थान संयुक्त मार्च के संयोजक श्री रमेश विंजोला ने बताया कि शहरी विकास विभाग की ए०डी०बी० विंग द्वारा राज्य की जनता को अनावश्यक कर्ज के बोझ तले दबाया जा रहा है तथा शहरी विकास विभाग के अधिकारी मस्त होकर आंख मूदे बैठे हैं। UUSDA के अधिकारियों ने मूल मंत्र दिया है-

“यावत्-जीवत् सुखम् जीवत्

ऋणम् कृत्वा घृतम् पिवत्”

इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है कि ए०डी०बी० के प्रथम चरण में स्वीकृत धनराशि को जब पेयजल/सीवरेज कार्यों में नहीं खपाया जा सका तो उक्त बजट को सड़क किनारे सौंर्दयीकरण में खर्च कर दिया गया। इसके तहत जहां राजपुर रोड़ पर सड़क किनारे बिना किसी नियोजन के कार्य करा दिये गये, वहीं बोलार्ड द्वारा विद्युतीकरण कार्य मात्र कागजों में कराया गया। राजपुर रोड़ पर जल संरक्षण के नाम पर जो संरचना बनायी गयी है, वह क्षेत्र विशेष के अनुरूप नहीं है।

जल संस्थान-जल निगम संयुक्त मोर्चे के संयोजक विजय खाली ने बताया कि ए०डी०बी० द्वारा पूर्व में कराये गये कार्यों की उच्च स्तरीय जांच आवश्यक है। शहरी विकास विभाग के अधिकारियों द्वारा लगातार ए०डी०बी० विंग द्वारा किये जा रहे काले कारनामों पर पर्दा डाला जा रहा है। जनपद नैनीताल में हल्द्वानी में ए०डी०बी० द्वारा वर्ष 2013 में 17 टैंक बनवाये गये थे जिनमें से 08 टैंक तो बनने के बाद से ही लगातार लीक हैं। लीक टैंको की लागत की भरपाई एजेन्सी से न कराना अपने आप में शहरी विकास विभाग के अधिकारियों के आचरण को प्रदर्शित करता है। इन 08 लीक टैंको से अब तक अरबो लीटर पानी का अपव्यय हो चुका है। उक्त पानी के उत्पादन में लगी बिजली की लागत ही लाखो रूपये है। धन्य है, शहरी विकास विभाग, जिसके इंजीनियर्स को काली सूची में डाल कर बर्खास्त किया जाना चाहिये थे, उन्हें पूरी UUSDA का ही सर्वे सर्वा बना दिया गया।

ऋणम् कृत्वा घृतम् पिवत्”

इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है कि ए०डी०बी० के प्रथम चरण में स्वीकृत धनराशि को जब पेयजल/सीवरेज कार्यों में नहीं खपाया जा सका तो उक्त बजट को सड़क किनारे सौंर्दयीकरण में खर्च कर दिया गया। इसके तहत जहां राजपुर रोड़ पर सड़क किनारे बिना किसी नियोजन के कार्य करा दिये गये, वहीं बोलार्ड द्वारा विद्युतीकरण कार्य मात्र कागजों में कराया गया। राजपुर रोड़ पर जल संरक्षण के नाम पर जो संरचना बनायी गयी है, वह क्षेत्र विशेष के अनुरूप नहीं है।

जल संस्थान-जल निगम संयुक्त मोर्चे के संयोजक विजय खाली ने बताया कि ए०डी०बी० द्वारा पूर्व में कराये गये कार्यों की उच्च स्तरीय जांच आवश्यक है। शहरी विकास विभाग के अधिकारियों द्वारा लगातार ए०डी०वी० विंग द्वारा किये जा रहे काले कारनामों पर पर्दा डाला जा रहा है। जनपद नैनीताल में हल्द्वानी में ए०डी०बी० द्वारा वर्ष 2013 में 17 टैंक बनवाये गये थे जिनमें से 08 टैंक तो बनने के बाद से ही लगातार लीक हैं। लीक टैंको की लागत की भरपाई एजेन्सी से न कराना अपने आप में शहरी विकास विभाग के अधिकारियों के आचरण को प्रदर्शित करता है। इन 08 लीक टैंको से अब तक अरबो लीटर पानी का अपव्यय हो चुका है। उक्त पानी के उत्पादन में लगी बिजली की लागत ही लाखो रूपये है। धन्य है, शहरी विकास विभाग, जिसके इंजीनियर्स को काली सूची में डाल कर बर्खास्त किया जाना चाहिये थे, उन्हें पूरी UUSDA का ही सर्वे सर्वा बना दिया गया।

पेयजल निगम कर्मचारी महासंघ के संयुक्त मंत्री श्री कमल कुमार द्वारा बताया गया कि देहरादून में नलकूप निर्माण हेतु सन् 1975 से ही जल संस्थान एवं जल निगम विशेषज्ञ विभाग है, जिन्हे पूरे क्षेत्र के भूगर्भीय स्थिति का अनुभव है वहीं ए०डी०बी० के प्रतिनियुक्ति पर बिजली विभाग के अभियन्ताओं ने भूगर्भीय स्थिति के विपरीत अज्ञानता व इतर कारणों से क्षेत्र के स्ट्राटा के विपरीत अधिक गहराई के नलकूप बनाये गये जबकि नलकूप क्षेत्र के विशेषज्ञ विभाग जल निगम / जल संस्थान व सिंचाई विभाग के अभियन्ता भली-भांति विज्ञ हैं कि देहरादून में नीचली सतह (200 मीटर से नीचे) शिवालिक चट्टाने हैं जिससे भू-जल की उपलब्धता नहीं है। ए०डी०बी० द्वारा बनाये गये नलकूप में अधिक गहराई तक आवश्यक ड्रिलिंग कर ठेकेदार को लाभ पहुंचाया गया है। एक नलकूप (बीमा कॉलोनी) तो ऐसे स्थान पर बना दिया गया जहां नलकूप की साध्यता को उत्तराखण्ड पेयजल निगम / उत्तराखण्ड जल संस्थान पूर्व में नकार चुके है। वहां पर नलकूप निर्माण कर 1.25 करोड़ रूपये खर्च कर दिये गये जबकि वहां बमुश्किल 150 एल०पी०एम० भी श्राव नहीं मिल पा रहा है।

धरना कार्यक्रम में निम्न कार्मिक उपस्थित रहे :-

श्री जितेन्द्र सिंह देव, श्री रमेश विंजोला, श्री विजय खाली, श्री श्याम सिंह नेगी, श्री गौरव बर्तवाल, श्री अजय सिंह चौहान, श्री मानवर सिंह बिष्ट, श्री बचन सिंह, श्री लाल सिंह रौतेला, श्री शिशुपाल सिंह रावत, श्री विनोद सिंह, श्री अशीष तिवारी, श्री धन सिंह चौहान, श्री संदीप मलोहत्रा, श्री नन्द कुमार तिवारी, श्री जगत सिंह, श्री रमेश चन्द्र शर्मा, श्रीमती सरिता नेगी, श्रीमती ममता भकुनी, श्रीमती संतोष पुण्डीर, श्रीमती काता देवी।

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