24 फरवरी से पेयजल कर्मचारियों की हो सकती है हड़ताल, सरकार के रुख से कर्मचारी हताश
देहरादून।उत्तराखंड पेयजल निगम व उत्तराखंड जल संस्थान का राजकीयकरण करते हुए एकीकरण करने की मांग और शहरी विकास विभाग द्वारा पेयजल विभाग के काम किए जाने के विरोध में पेयजल निगम कार्मिकों द्वारा जनवरी माह में किया गया आंदोलन मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी जी के आश्वासन पर 20 फरवरी तक के लिए स्थगित किया गया था। मुख्यमंत्री जी द्वारा दिए गए आश्वासन पर तब पेयजल कर्मचारी अपना धरना स्थगित करने और हड़ताल न करने के लिए मान गए थे। लेकिन शासन के अधिकारियों की सुस्ती के कारण एक भी मांग पर कोई शासनादेश अभी तक जारी नहीं हो पाया है। इसके विरोध में पेयजल निगम कार्मिक फिर से आंदोलन प्रारंभ करने पर आमादा हो गए हैं। कार्मिकों द्वारा आज 5:00 बजे सायं एक आपात बैठक बुलाई गई है, जिसमें कोई कड़ा आंदोलन कार्यक्रम प्रस्तावित करने पर मंथन होने की उम्मीद है। सूत्रों के अनुसार शीघ्र ही आचार संहिता लागू होने के दृष्टिगत उनकी मांगे लटकने और 20 दिन गुजरने पर भी कोई कार्यवाही न होने के कारण अपनी मांगों को मनवाने के लिए कर्मचारी सीधे हड़ताल जैसा निर्णय भी ले सकते हैं। पेयजल कार्मिकों द्वारा यदि हड़ताल की जाती है तो इसका असर सरकार और जनता पर पड़ना तय है। जहां एक और जल संस्थान के कर्मचारी इससे जुड़े होने से पानी की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है वही जल निगम द्वारा किए जा रहे जल जीवन मिशन के काम भी पिछड़ने तय हैं। सूत्रों के अनुसार फरवरी माह के अंतिम सप्ताह में किसी भी दिन से कर्मचारी हड़ताल पर जाने की घोषणा कर सकते हैं।

