उत्तराखंड जल संस्थान में सिविल और विद्युत/यांत्रिक अभियंताओं के अलग-अलग कैडर बनेंगे
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उत्तराखंड जल संस्थान में सिविल और विद्युत/यांत्रिक अभियंताओं के अलग-अलग कैडर बनेंगे
कनिष्ठ अभियंता से लेकर महाप्रबंधक तक पदों के निर्धारण का अनुपात तय, शासन ने नियमावली में संशोधन के लिए मांगा ड्राफ्ट
देहरादून। उत्तराखंड जल संस्थान में सिविल और विद्युत/यांत्रिक अभियंताओं के लिए अलग-अलग कैडर गठित करने की दिशा में शासन ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। शासन ने दोनों संवर्गों के पदों का अनुपात निर्धारित करते हुए उत्तराखंड जल संस्थान की मौजूदा सेवा नियमावली में संशोधन की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए हैं।
पेयजल एवं स्वच्छता अनुभाग-1 की ओर से संयुक्त सचिव विक्रम सिंह राणा ने आठ अक्टूबर 2026 को इस संबंध में उत्तराखंड जल संस्थान के मुख्य महाप्रबंधक को पत्र जारी किया है। पत्र के अनुसार, शासन स्तर पर विचार-विमर्श के बाद सिविल तथा विद्युत/यांत्रिक अभियंताओं के पृथक-पृथक कैडर के गठन और पदों के मात्राकरण के संबंध में निर्णय लिया गया है।
शासन ने कनिष्ठ अभियंता और सहायक अभियंता के पदों पर सिविल तथा विद्युत/यांत्रिक संवर्ग का अनुपात 4:1 निर्धारित किया है। वहीं, अधिशासी अभियंता के पदों पर दोनों संवर्गों का अनुपात 2:1 रहेगा। अधीक्षण अभियंता से लेकर महाप्रबंधक तक के पदों पर सिविल और विद्युत/यांत्रिक अभियंताओं का अनुपात 1:1 रखने का निर्णय लिया गया है।
पत्र में स्पष्ट किया गया है कि भविष्य में सेवानिवृत्ति के कारण रिक्त होने वाले पदों तथा सृजित होने वाले पदों के सापेक्ष संबंधित संवर्ग के अनुसार समायोजन किया जाएगा। इसका उद्देश्य निर्धारित अनुपात के अनुरूप दोनों संवर्गों में पदों की व्यवस्था सुनिश्चित करना है।
शासन ने उत्तराखंड जल संस्थान को निर्देश दिए हैं कि इस व्यवस्था को लागू करने के लिए उत्तराखंड जल संस्थान में प्रचलित सेवा नियमावली, 2011 तथा संशोधित नियमावली, 2013 में आवश्यक संशोधन किया जाए। इसके लिए नियमावली का संशोधित प्रारूप तत्काल शासन को उपलब्ध कराने को कहा गया है।
शासन के इस निर्णय से जल संस्थान में अभियंताओं के संवर्गीय ढांचे को अलग-अलग निर्धारित करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। हालांकि, पृथक कैडर की व्यवस्था लागू करने के लिए सेवा नियमावली में संशोधन की प्रक्रिया पूरी होना आवश्यक होगा।

