उत्तराखंड

मुख्य सचिव और पेयजल निगम के MD के आदेशों को नहीं मानते ये चीफ इंजीनियर

देहरादून। उत्तराखंड पेयजल निगम के मुख्य अभियंता के.के रस्तोगी का मोह देहरादून से नहीं छूट पा रहा है। सरकार की सोच है कि अधिकारी पहाड़ों में रहेंगे तो वहां का दर्द समझ सकेंगे और उसके अनुरुप विकास को तकनीकी के साथ जोड़कर आगे बढ़ाएंगे, लेकिन हो तो रहा है इसके ठीक उलट। पेयजल निगम में एक ऐसा मामला सामने आया है, जो सरकार के सपनों को आइना दिखा रहा है।उत्तराखंड पेयजल नियम के मुख्य अभियंता के.के रस्तोगी,मुख्य अभियंता कार्यालय पौड़ी से ज्यादातर गायब रहते है।दिलचस्प बात य़ह है कि पेयजल निगम मुख्य महाप्रबंधक कार्यालय से इस अधिकारी पर कोई कार्रवाई नहीं होती।

मानसून सीजन को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और मुख्य सचिव नें प्रदेश के सभी विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि कोई भी अधिकारी बिना वजह अपने कार्यालय से गायब नही रहेंगे और मुख्यालय मे बने रहेंगे।पेयजल निगम के एमडी उदयराज ने एक आदेश में कहा था कि अधीक्षण अभियंता एवं मुख्य अभियंता स्तर के अधिकारी बिना अवकाश स्वीकृत किए अपने मुख्यालय से अवकाश पर प्रस्थान कर जाते हैं जिसकी सूचना उनके द्वारा समय पर नहीं दी जाती है उनके अवकाश पर प्रस्थान करने के फलस्वरूप राजकीय बैठको में प्रतिभाग न करने अथवा वांछित सूचना उपलब्ध ना होने के कारण राजकीय कार्यों में व्यवधान उत्पन्न होता है।मुख्य अभियंता मुख्यालय स्तर से अधिकारियों के अवकाश के संबंध में पूछे जाने पर उनको भी अवकाश के संबंध में कोई जानकारी प्राप्त नहीं होती यह स्थिति अत्यंत अत्यंत खेद जनक है।पेयजल निगम के एमडी उदय राज ने साफ आदेश दिए थे कि कोई मुख्य अभियंता या अधीक्षण अभियंता बिना जिलाधिकारी को सूचित किए बिना उत्तराखंड पेयजल निगम मुख्यालय नहीं छोड़ेंगे।लेकिन पेयजल निगम के मुख्य अभियंता के.के रस्तोगी अक्सर पौड़ी मुख्य अभियंता कार्यालय से गायब रहकर देहरादून मे ही रहते है।अब देखना दिलचस्प होगा कि पेयजल निगम के MD और मुख्य सचिव के स्तर से इस अधिकारी के विरुद्ध कोई कार्रवाई होती है कि नहीं।

बता दें कि पेयजल विभाग सबसे महत्वपूर्ण विभागों में से एक है। निगम के पास राज्य ही नहीं केंद्र सरकार की भी कई महत्वकांक्षी योजनाओं के संचालन का जिम्मा है। जल जीवन मिशन जैसी अत्यंत महत्वपूर्ण परियोजना का क्रियान्वयन बहुत तेजी के साथ पूरा किया जाना है, जिसमें किसी भी तरह की हीला-हवाली पर केंद्र सरकार मदद भी रोक सकती है।

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