नाबार्ड के ‘सेब महोत्सव 3.0’ में 2,400 किलो सेब और 700 किलो कीवी की बिक्री
नाबार्ड के ‘सेब महोत्सव 3.0’ में 2,400 किलो सेब और 700 किलो कीवी की बिक्री
मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने किया महोत्सव का उद्घाटन, किसानों और स्वयं सहायता समूहों को मिला बेहतर बाजार
देहरादून। राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) के उत्तराखण्ड क्षेत्रीय कार्यालय, देहरादून की ओर से 8 और 9 अक्टूबर को दो दिवसीय ‘सेब महोत्सव 3.0’ का आयोजन किया गया। महोत्सव का उद्देश्य जनजातीय विकास निधि (TDF) परियोजनाओं के लाभार्थियों, किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) और स्वयं सहायता समूहों (SHGs) के उत्पादों के विपणन को प्रोत्साहित करना तथा उन्हें बेहतर बाजार उपलब्ध कराना रहा।
महोत्सव का उद्घाटन प्रदेश के मुख्य सचिव श्री आनंद बर्द्धन ने किया। इस अवसर पर उन्होंने नाबार्ड की पहल की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह के आयोजन प्रदेश के विविध कृषि एवं स्थानीय उत्पादों के प्रति उपभोक्ताओं में जागरूकता बढ़ाने के साथ ही किसानों और उत्पादकों को अपने उत्पादों की बिक्री के लिए प्रभावी मंच उपलब्ध कराते हैं। इससे स्थानीय उत्पादों को बाजार में पहचान दिलाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में भी मदद मिलती है।
कार्यक्रम के दौरान नाबार्ड के उत्तराखण्ड क्षेत्रीय कार्यालय के मुख्य महाप्रबंधक श्री पंकज यादव ने महोत्सव में प्रदर्शित और बिक्री के लिए उपलब्ध विभिन्न उत्पादों की जानकारी दी। उन्होंने आयोजन के माध्यम से किसानों, उत्पादक संगठनों और स्वयं सहायता समूहों को अपने उत्पाद सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंचाने का अवसर मिलने के महत्व को रेखांकित किया।
समारोह में उत्तराखण्ड शासन के कृषि एवं कृषक कल्याण विभाग के सचिव श्री एस.एन. पाण्डेय तथा भारतीय रिजर्व बैंक के क्षेत्रीय निदेशक श्री हर्ष कुमार गौतम विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इसके अलावा विभिन्न बैंकों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी कार्यक्रम में प्रतिभाग किया।
सेब और कीवी की बिक्री बनी आकर्षण का केंद्र
दो दिवसीय महोत्सव के दौरान उपभोक्ताओं ने स्थानीय कृषि उपज और अन्य उत्पादों में खास रुचि दिखाई। आयोजन में लगभग 2,400 किलोग्राम सेब और 700 किलोग्राम कीवी फल की बिक्री दर्ज की गई। इसके साथ ही हथकरघा उत्पादों, डेयरी उत्पादों और भौगोलिक संकेतक (GI) टैग प्राप्त विभिन्न उत्पादों की भी उल्लेखनीय बिक्री हुई।
नाबार्ड की यह पहल उत्तराखण्ड के किसानों, ग्रामीण उद्यमियों, किसान उत्पादक संगठनों और स्वयं सहायता समूहों को बाजार से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हुई। ऐसे आयोजनों से स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहन मिलने के साथ उत्पादकों को अपनी उपज और हस्तनिर्मित वस्तुओं के लिए नए ग्राहक प्राप्त करने के अवसर भी मिलते हैं।

