विश्व मानक दिवस पर BIS देहरादून का आयोजन, स्वच्छ एवं सस्ती ऊर्जा को बढ़ावा देने पर जोर
विश्व मानक दिवस पर BIS देहरादून का आयोजन, स्वच्छ एवं सस्ती ऊर्जा को बढ़ावा देने पर जोर
देहरादून। भारतीय मानक ब्यूरो (BIS), देहरादून शाखा कार्यालय की ओर से विश्व मानक दिवस के अवसर पर मोहब्बेवाला स्थित एक होटल में कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस वर्ष की थीम “सतत विकास लक्ष्य–7: सस्ती एवं स्वच्छ ऊर्जा” पर केंद्रित कार्यक्रम में उद्योग जगत, औद्योगिक संगठनों, ज्वेलरी क्षेत्र और BIS के लाइसेंसधारकों सहित 200 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि देहरादून के महापौर श्री सौरभ थपलियाल रहे, जबकि खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग की अपर सचिव सुश्री रुचि मोहन रयाल ने विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर उद्योग विभाग के संयुक्त निदेशक श्री अनुपम द्विवेदी सहित इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (IIA), इंडस्ट्रीज एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड, PHDCCI तथा UIWA के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य सस्ती एवं स्वच्छ ऊर्जा को प्रोत्साहित करने, ऊर्जा दक्षता बढ़ाने और नवीकरणीय ऊर्जा प्रौद्योगिकियों के उपयोग को बढ़ावा देने में भारतीय मानकों की महत्वपूर्ण भूमिका के प्रति जागरूकता विकसित करना था। इस दौरान विशेषज्ञों ने स्वच्छ एवं किफायती ऊर्जा से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तृत प्रस्तुतियां दीं। साथ ही ऊर्जा क्षेत्र में गुणवत्ता, सुरक्षा और मानकीकरण के महत्व पर भी चर्चा की गई।
BIS की अनुपालन प्रक्रिया और हॉलमार्किंग सुधारों की दी जानकारी
कार्यक्रम में BIS देहरादून शाखा कार्यालय के निदेशक एवं प्रमुख श्री हेमंत आड़े ने भारतीय मानक ब्यूरो की ओर से किए जा रहे विभिन्न सुधारों की जानकारी दी। उन्होंने अनुपालन प्रक्रियाओं को सरल बनाने, उद्योगों के लिए ईज ऑफ कम्प्लायंस को बढ़ावा देने तथा हॉलमार्किंग व्यवस्था में किए जा रहे नवीनतम सुधारों पर प्रकाश डाला।
उन्होंने मानकीकरण की प्रक्रिया को उद्योगों के अनुकूल बनाने और गुणवत्ता संबंधी मानकों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के महत्व को रेखांकित किया।
कार्यक्रम में उद्योग जगत के प्रतिनिधियों और BIS के लाइसेंसधारकों की सहभागिता ने मानकीकरण, ऊर्जा दक्षता और स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में आपसी सहयोग तथा जागरूकता बढ़ाने के महत्व को सामने रखा। विश्व मानक दिवस के अवसर पर आयोजित यह कार्यक्रम सतत विकास के लक्ष्यों की प्राप्ति में भारतीय मानकों की भूमिका को रेखांकित करने वाला रहा।

